मधुबनी, (ईएमएस)। बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर मधुबनी जिले में बाल श्रम के खिलाफ व्यापक जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत गुरुवार को उप विकास आयुक्त सुमन कुमार साहु ने जिला परिषद परिसर स्थित श्रम अधीक्षक कार्यालय से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जागरूकता रथ जिले के विभिन्न शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण कर आम लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम नहीं लेने के प्रति समाज को सचेत करना और कानून के प्रति जागरूकता फैलाना है। अधिकारियों ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम, 1986 के तहत बाल श्रम एक दंडनीय अपराध है। यदि किसी भी दुकान, प्रतिष्ठान या संस्था में बाल श्रम पाया जाता है, तो संबंधित नियोजक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। इसके तहत 20,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना और दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर दोषी नियोजकों से प्रति बाल श्रमिक 20,000 रुपये की अतिरिक्त राशि वसूलने का भी प्रावधान है। जिससे बाल श्रमिकों के पुनर्वास में सहायता दी जा सके। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे बाल श्रम की किसी भी घटना की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें। ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। यह अभियान जिले में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस अवसर पर श्रम विभाग के पदाधिकारी, डेटा एंट्री ऑपरेटर, कार्यालय कर्मी, सर्वेक्षण संस्थान के प्रतिनिधि तथा ग्राम विकास युवा ट्रस्ट के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने बाल श्रम के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। - ३० अप्रैल/२०२६/ईएमएस