राष्ट्रीय
01-May-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। नेपाल के नए पीएम बनने के बाद बालेन शाह को पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत आने का न्योता दिया था। शाह ने इसे स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब जानकारी मिल रही है कि बालेन शाह इस साल भारत नहीं आएंगे। सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के महासचिव भूपदेव शाह ने एक इंटव्यू में यह जानकारी दी है। बालेन शाह की तरफ से न्योता स्वीकार करना दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भूप देव शाह ने कहा कि वह विदेश यात्राओं पर जाएंगे, लेकिन इससे पहले वह आम जनता के मुद्दों को पहल देंगे. विकास का मुद्दा सबसे केंद्र में रहेगा। इससे साफ हो गया है कि कोई पीएम बालेन शाह की भारत से कोई नाराजगी नहीं है। इस साल पीएम शाह कोई भी विदेशी दौरा नहीं करेंगे जा रहे है। ऐसा नहीं है कि बालेन शाह केवल विदेशी दौरों से दूरी बना रहे हैं। बालेन शाह आरएसपी के आगामी महाधिवेशन में भाग नहीं लेने का मन बना चुके हैं। शाह ने बताया कि वह किसी भी आम नागरिक की तरह पीएम समाचारों से अधिवेशन के अपडेट लेंगे। उनका पूरा ध्यान सरकार में अपनी कार्यकारी भूमिका पर रहेगा। उन्होंने साफ किया कि प्रधानमंत्री आंतरिक पार्टी कार्यक्रम की बजाय कार्यवाही को ज्यादा तरजीह देंगे, लेकिन नेपाल की विदेश नीति पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट इसे पिछले 4 दशकों से चली आ रही नीति में बदलाव के रूप में देख रहे हैं। 1990 के बाद जो भी देश में पीएम बना है उसने जल्द ही विदेश दौरा किया है। 2008 में पीएम पुष्प कमल दहल ने प्रधानमंत्री बनने के बाद चीन का दौरा किया था। ये दौर पद संभालने के बाद केवल एक महीने के भीतर था। बालेन शाह की भारत यात्रा दोनों देशों के लिए अहम मानी जा रही थी। भारत नेपाल का सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार में से है। आधारभूत गतिविधियां और ऊर्जा क्षेत्र में काम किया है। भारत और नेपाल ने विकास परियोजनाओं जैसे रेल और सड़क से संबंधों को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया है। इससे दोनों देश में विकास गति को बढ़ावा मिला है। नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा को देखते हुए, व्यापार को सुगम बनाने और लोगों के आपसी आवागमन को आसान बनाने की उम्मीद थी। इससे पहले जून 2023 में नेपाल के पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड में भारत आए थे। सिराज/ईएमएस 01मई26