हार्वर्ड (ईएमएस)। ताजा रिसर्च के नतीजों से पता चला है कि मनुष्य का विकास क्रम अब भी जारी है और हमारा जैविक सॉफ्टवेयर लगातार अपडेट हो रहा है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन ने पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। चार्ल्स डार्विन के नैचुरल सलेक्शन सिद्धांत के अनुसार, समय के साथ प्रजातियों में बदलाव आते हैं और अनुकूल गुणों वाले जीव जीवित रहते हैं। पहले विज्ञान मानता था कि लगभग दस हजार साल पहले इंसानों का शरीर स्थिर हो चुका था। लेकिन, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के वैज्ञानिकों ने पंद्रह हजार से अधिक प्राचीन मानव अवशेषों के डीएनए की जांच कर यह साबित किया है कि विकास का पहिया अभी थमा नहीं है। इंसानों के डीएनए में उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से परिवर्तन आए हैं। अध्ययन में पश्चिमी यूरेशिया के इंसानों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें पाया गया कि हाल के इतिहास में नैचुरल सलेक्शन ने लगभग पाँच सौ जेनेटिक वैरिएंट्स को बढ़ावा दिया है। इनमें पुरुषों में लाल बाल और कम गंजेपन से जुड़े जीन भी शामिल हैं। इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने त्वचा का हल्का रंग, शराब की लत का कम जोखिम और सीलिएक रोग का बढ़ा हुआ जोखिम जैसे प्रमुख लक्षण भी चिह्नित किए हैं, जो प्राकृतिक चयन के कारण विकसित हुए हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में आनुवंशिकी के प्रोफेसर अली अकबरी, जो इस शोध दल का हिस्सा थे, ने लाइव साइंस को बताया कि मानव विकास की गति धीमी नहीं हुई थी, बस ऐसा था कि हम इसके संकेतों को पकड़ नहीं पा रहे थे। शोधकर्ताओं ने सात साल तक दस हजार साल पुराने डीएनए नमूनों का अध्ययन किया। उनका कहना है कि जब इंसानों ने शिकार छोड़कर खेती करना शुरू किया, तब से प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया कुछ तेज हो गई है। हालांकि, वैज्ञानिक अभी भी पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं हैं कि विकासवाद ने इन्हीं खास लक्षणों को क्यों चुना। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह संभव है कि लाल बाल होने जैसा कोई लक्षण इसलिए आगे बढ़ा हो क्योंकि वह किसी अन्य ऐसे जीन के करीब था, जिसे प्रकृति स्वयं बढ़ावा दे रही थी। इस अध्ययन के नतीजों पर कुछ वैज्ञानिकों का एक धड़ा संदेह भी व्यक्त कर रहा है और वे नैचुरल सलेक्शन के लिए अधिक पुख्ता सबूतों पर जोर दे रहे हैं। इस महत्वपूर्ण रिसर्च से भविष्य में जीन थेरेपी के विकास में बड़ी मदद मिल सकती है। यदि डॉक्टरों को यह पता हो कि किसी खास जीन को प्रकृति ने जानबूझकर चुना है, तो उसे हटाने या बदलने से पहले वे अधिक सावधानी बरत सकेंगे। बता दें कि मानव विकास को लेकर अब तक यह माना जाता रहा है कि एक निश्चित समय के बाद इंसानों में शारीरिक और जैविक बदलाव लगभग रुक गए हैं, लेकिन ताजा अध्ययन ने यह सालों पुरानी धारणा को बदल दिया है। सुदामा/ईएमएस 02 मई 2026