ज़रा हटके
02-May-2026
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लंदन (ईएमएस)। आपको सुनकर हैरानी होगी कि मध्य और दक्षिण अमेरिका के जंगलों में रहने वाला स्लॉथ नाम का जानवर रोजाना 20 से 22 घंटे तक सोता रहता है। यह इतना आलसी है कि पेड़ पर उल्टा लटककर अपनी पूरी जिंदगी बिताता है, और कई बार इसी अत्यधिक आलस की वजह से उसकी मौत भी हो जाती है। स्लॉथ मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं – टू-टोएड (दो पंजों वाले) और थ्री-टोएड (तीन पंजों वाले)। थ्री-टोएड स्लॉथ को ज्यादा आलसी माना जाता है। ये जानवर इतने सुस्त हैं कि उनकी चाल की रफ्तार सिर्फ 0.24 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। इसका मतलब है कि अगर कोई स्लॉथ किसी एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाना चाहे तो उसे पूरा एक दिन लग सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इनका मेटाबॉलिज्म इतना धीमा और कमजोर होता है कि वे दूसरे स्तनधारियों की तुलना में सिर्फ एक तिहाई ऊर्जा का ही इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि वे दिन में ज्यादातर समय सोते रहते हैं और कम ऊर्जा खर्च करते हैं। स्लॉथ का पूरा जीवन पेड़ों पर ही बीतता है। वे शायद ही कभी जमीन पर उतरते हैं। हफ्ते में सिर्फ एक बार शौच के लिए नीचे आते हैं और फिर तुरंत वापस पेड़ पर चढ़ जाते हैं। इस दौरान वे इतने धीमे होते हैं कि शिकारी आसानी से उन्हें पकड़ सकते हैं। लेकिन प्रकृति ने उन्हें एक खास बचाव भी दिया है उनके फर पर हरे रंग का शैवाल उग आता है। इससे वे पेड़ों के पत्तों के साथ घुल-मिल जाते हैं और शिकारियों से छिप जाते हैं, जिससे उन्हें बेहतरीन छद्मावरण (कैमोफ्लाज) मिलता है। उनका फर उल्टी दिशा में बढ़ता है ताकि बारिश का पानी आसानी से बह जाए और वे सूखे रहें। फोटोग्राफरों ने जंगल में इस कामचोर जानवर को कई बार कैद किया है। ये पेड़ की डाल पर ज्यादातर उल्टा लटका हुआ दिख जाता है, जिसकी आँखें बंद, मुँह थोड़ा खुला और बिल्कुल निश्चिंत नजर आता है। देखने वाले हैरान रह जाते हैं कि इतना आलसी जानवर कैसे जिंदा रहता है। दरअसल, स्लॉथ का आहार मुख्य रूप से पत्तियां, टहनियां और फल होता है। लेकिन ये पत्तियां इतनी कम पोषक तत्व वाली होती हैं कि स्लॉथ को इन्हें पचाने में एक महीना तक लग जाता है। इसलिए वे कम खाते हैं और ज्यादा सोते हैं, क्योंकि भोजन से ऊर्जा निकालने की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है। कई बार खाना ना मिलने या पेड़ से गिरने से उनकी मौत हो जाती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि स्लॉथ का शरीर इतना अनुकूलित है कि वे 10 डिग्री सेल्सियस तक का कम तापमान भी आसानी से सहन कर लेते हैं। उनका शरीर इतना धीमा चलता है कि वे हफ्तों तक बिना खाए-पीए रह सकते हैं। लेकिन यही आलस उनके लिए खतरा भी बन जाता है। अगर वे किसी पेड़ से गिर गए तो वापस चढ़ने में इतना समय लगता है कि शिकारी उन्हें आसानी से मार सकते हैं। कुछ मामलों में वे भूख से कमजोर होकर मर जाते हैं। फिर भी ये जानवर लाखों सालों से जंगलों में अपनी धीमी रफ्तार से जी रहे हैं। स्लॉथ की जिंदगी देखकर लगता है कि आलस भी एक सर्वाइवल स्ट्रेटजी (जीवित रहने की रणनीति) है। वे इतने कम ऊर्जा खर्च करते हैं कि उनके पास ज्यादा खाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। मादा स्लॉथ साल में सिर्फ एक बच्चा देती है। सुदामा/ईएमएस 02 मई 2026