* स्वास्थ्य कारणों के आधार पर गुजरात हाईकोर्ट का मानवीय दृष्टिकोण, अगली सुनवाई 12 जून को अहमदाबाद (ईएमएस)| दुष्कर्म के गंभीर मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से एक बार फिर महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाकर अब 15 जून 2026 तक कर दी है। गौरतलब है कि वर्ष 2013 में दर्ज इस मामले में आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद से वे जेल में बंद हैं। हालांकि, बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए 6 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने उन्हें 6 महीने की अंतरिम जमानत दी थी, जिसकी अवधि 6 मई 2026 को समाप्त होने वाली थी। इससे पहले ही उनके वकील आशिष डगली ने जमानत अवधि बढ़ाने के लिए अदालत में याचिका दाखिल की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आसाराम की तबीयत लगातार नाजुक बनी हुई है और उन्हें नियमित चिकित्सा निगरानी, समय-समय पर जांच तथा आपातकालीन उपचार की आवश्यकता है। वहीं, सरकार की ओर से पेश वकील ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले की अपील पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है, ऐसे में जमानत बढ़ाने की जरूरत नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की समीक्षा की। अदालत ने पाया कि जमानत के दौरान आसाराम ने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर है, जिसके लिए लगातार इलाज आवश्यक है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मानवीय आधार पर अंतरिम जमानत को 15 जून 2026 तक बढ़ाने का फैसला सुनाया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पहले दी गई सभी शर्तें यथावत लागू रहेंगी। मामले की अगली सुनवाई अब 12 जून 2026 को निर्धारित की गई है, जहां परिस्थितियों के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा। बचाव पक्ष ने इस फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे उनके मुवक्किल को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। सतीश/02 मई