छोटू सिलेंडर सबसे महंगा पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का मतदान 29 अप्रैल को जैसे ही खत्म हुआ उसके तुरंत बाद सरकार की सबसे बड़ी महंगाई की गाज गरीबों और मध्यम वर्ग के ऊपर पड़ी है। पेट्रोलियम कंपनियों ने 5 किलो के छोटे सिलेंडर में 261 रुपए की मूल्य वृद्धि कर दी है। भारत में यह सबसे महंगी गैस हो गई है जो 162 रुपए किलो गरीबों को खरीदनी पड़ेगी। पेट्रोलियम कंपनियों ने कमर्शियल रसोई गैस के सिलेंडर से ज्यादा छोटू सिलेंडर की रखी है। निदित रूप से 5 किलो वाले सिलेंडर की सप्लाई पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा की जा रही है। पिछले दो महीने में सरकार और पेट्रोलियम कंपनी ने 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर के कनेक्शन बड़ी मात्रा में उपलब्ध कराए हैं। अमेरिका और ईरान युद्ध के बाद एलपीजी गैस की कमी होने के कारण सरकार ने एक तीर से दो शिकार किए हैं। 5 किलो के छोटू सिलेंडर ज्यादा से ज्यादा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके लिए लोगों को 5 किलो के सिलेंडर लेने पड़ रहे हैं। इसमें भी पेट्रोलियम कंपनी को कमाई हो रही है। गैस के दाम भी सबसे ज्यादा कर दिए हैं। लाखों लोग रोजाना 5 किलो के सिलेंडर पेट्रोलियम कंपनियों से ले रहे हैं। 14 किलो वाले सिलेंडर की सप्लाई लगातार कम होती जा रही है। इसमें सरकार को सब्सिडी देना पड़ती है। दूसरा इसके लिए गैस भी पेट्रोलियम कंपनियों के पास ज्यादा होनी चाहिए। एक संयोजित रणनीति के तहत 14 किलो के गैस सिलेंडर के स्थान पर 5 किलो के गैस सिलेंडर की सप्लाई बढ़ा दी गई है। भारत में सबसे महंगी गैस गरीबों और मध्यम वर्ग को खरीदना पड़ रही है। कमर्शियल गैस सिलेंडर जो 19 किलो वाला है वह भी छोटू सिलेंडर की तुलना में कम कीमत पर पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा बेचा जा रहा है। रही सही कसर दो-चार दिन में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने को लेकर पूरी होने जा रही है। पेट्रोलियम मंत्री ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का संकेत दे दिया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक माह में तीन से चार बार कीमत बढ़ाई जाएगी। 20 से 25 रुपये प्रति लीटर डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। जैसे ही पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे उसके बाद बड़ी तेजी के साथ हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ेगी। इसका खामियाजा भी सबसे ज्यादा गरीब और मध्यम वर्ग को ही भुगतना पड़ेगा। इन्हीं की जनसंख्या सबसे ज्यादा है। यही सबसे ज्यादा खाते हैं, पीते हैं, खर्च करते हैं और बोझ भी बहुत सारा सरकार इन्हीं पर डाल रही है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी निजी पेट्रोलियम कंपनियों के ऊपर बड़े मेहरबान हैं। पिछले 4 साल में जब कच्चे तेल के दाम कम थे, उस समय भी निजी क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी को भारी मुनाफा कमाने का मौका दिया गया। रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल कम कीमत पर आयात किया गया। इसका लाभ भारत के उपभोक्ताओं को नहीं मिला। निजी कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल को खरीदकर उसे रिफाइन करके विदेशों में निर्यात किया और भारी मुनाफा कमाया। अभी भी सरकार पेट्रोलियम कंपनियों के ऊपर मेहरबान है। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटा दी है। इसका फायदा पेट्रोलियम कंपनी को हुआ है। लेकिन अब सरकार जिस तरह से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाने की अनुमति पेट्रोलियम कंपनी को दे रही है उसके बाद महंगाई की गाज गरीबों और मध्यम वर्ग के ऊपर गिरना तय है। इसको लेकर लोगों में अभी से घबराहट दिखने लगी है। आगे भगवान ही मालिक है। सरकार ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। इसको लेकर सभी को हैरानी हो रही है। एसजे/ 2 मई /2026