- 16 मंजिला झलक पैराडाइज पर अदालत का बुलडोजर, इमारत को जमींदोज करने के निर्देश उल्हासनगर, (ईएमएस)। उल्हासनगर में अवैध निर्माण के साम्राज्य पर आखिरकार अदालत का बुलडोजर चल गया है। 16 मंजिला “झलक पैराडाइज” इमारत को पूरी तरह गिराने का आदेश बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिया है, जिससे शहर के बिल्डर लॉबी को बड़ा झटका लगा है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खड़ी की गई यह गगनचुंबी इमारत अब भ्रष्ट महानगरपालिका तंत्र, बिल्डर-सांठगांठ और नियमों के उल्लंघन का प्रतीक बन गई है। उल्हासनगर की चर्चित “झलक पैराडाइज” इमारत मामले में हाईकोर्ट के सख्त फैसले से अवैध निर्माण से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। न्यायमूर्ति कमल काथा और ए.एस. गडकरी की खंडपीठ ने डेवलपर की याचिका खारिज करते हुए उल्हासनगर महानगरपालिका को पूरी इमारत गिराने के स्पष्ट निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि डेवलपर ने फर्जी और भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर निर्माण की अनुमति हासिल की थी। साथ ही, नगर रचनाकार प्रकाश मुले पर भी दस्तावेजों की सही जांच न करने और गंभीर लापरवाही बरतने को लेकर कड़ी टिप्पणी की गई। जांच में सामने आया कि यह इमारत 24 मीटर और 36 मीटर डीपी रोड पर लगभग 80 प्रतिशत अतिक्रमण करके बनाई गई थी। डेवलपर ने खुद डीपी रोड के लिए जमीन छोड़ने की बात स्वीकार की थी, लेकिन बाद में विरोधाभासी दावे किए, जिसके चलते अदालत ने सभी मंजूरियों को अवैध ठहराते हुए कोई राहत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले 2024 में तत्कालीन आयुक्त अजीज शेख ने भी अतिक्रमण वाले हिस्से को तोड़ने का आदेश दिया था। प्रहार जनशक्ति पार्टी के ठाणे जिला अध्यक्ष एडवोकेट स्वप्निल पाटिल और शैलेश तिवारी के प्रयासों से यह मामला मजबूती से अदालत में पेश किया गया। अब इस फैसले के बाद मनपा प्रशासन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है, और उल्हासनगर में अवैध निर्माण के खिलाफ यह निर्णय ऐतिहासिक माना जा रहा है। संतोष झा- ०२ मई/२०२६/ईएमएस