राज्य
02-May-2026
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* अडाजन से जीणोद तक एस.टी. बस में यात्रा, यात्रियों से संवाद कर जाना हाल; ग्रामीण कल्याण कार्यक्रमों से जोड़ रहे जन-जन को सूरत (ईएमएस)| गुजरात के राज्यपाल अपनी सादगी और जनसंवेदना के लिए लगातार चर्चा में रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने एक बार फिर लोकभवन की सुविधाएं छोड़कर आम जनता के बीच पहुंचने का उदाहरण पेश किया। राज्यपाल ने सूरत के अडाजन बस स्टैंड से ओलपाड तालुका के जीणोद गांव तक गुजरात राज्य पथ परिवहन निगम (जीएसआरटीसी) की साधारण बस में यात्रा की। यात्रा के दौरान उन्होंने बस में मौजूद यात्रियों से आत्मीयता और सम्मान के साथ बातचीत की। उन्होंने यात्रियों का हालचाल जाना, उनकी समस्याएं सुनीं और सरकारी परिवहन सेवा का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। यात्रियों के लिए यह क्षण सुखद और आश्चर्यजनक था कि राज्य का प्रथम नागरिक उनके बीच एक सामान्य यात्री की तरह बैठा है। यह पहली बार नहीं है जब राज्यपाल ने ऐसा किया हो। इससे पहले भी वे कई बार एस.टी. बस में सफर कर चुके हैं। भीषण गर्मी के बीच उनकी यह यात्रा उनके जीवन मूल्यों, प्रभावी जनसंपर्क और सार्वजनिक सेवाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल आचार्य देवव्रत हर सप्ताह ‘ग्राम कल्याण कार्यक्रम’ के तहत किसी एक तालुका का दौरा करते हैं। इस दौरान वे गांव में एक एकड़ भूमि पर ग्रामीणों के साथ नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण करते हैं। इसके बाद वे स्वयं झाड़ू उठाकर गांव में स्वच्छता अभियान चलाते हैं और किसी अनुसूचित जाति या जनजाति परिवार के घर भोजन ग्रहण करते हैं। रात्रि सभा में वे ग्रामीणों के साथ शिक्षा, संस्कार, नशामुक्ति, स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और प्राकृतिक खेती जैसे विषयों पर चर्चा करते हैं। अपने प्रवास के दौरान वे किसी विशेष सुविधा वाले भवन में नहीं, बल्कि गांव की सरकारी स्कूल के सामान्य कक्ष में ही विश्राम करते हैं। अगली सुबह वे स्कूली बच्चों के साथ योग-प्राणायाम करते हैं और फिर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के खेतों का दौरा कर अन्य किसानों को भी मार्गदर्शन देते हैं। यहां तक कि वे खेत में गाय का दूध दुहने जैसी गतिविधियों में भी भाग लेते हैं। कार्यक्रम के अंत में पूरे तालुका के किसानों के साथ प्राकृतिक खेती पर संवाद किया जाता है। राज्यपाल की यह पहल न केवल प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम कर रही है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा भी दे रही है। सतीश/02 मई