:: कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में बड़ा निर्णय : संभाग में अब विवाह पूर्व जांच बनेगा अभियान; सामूहिक सम्मेलनों में अनिवार्य होगी सिकलसेल की स्क्रीनिंग :: इंदौर (ईएमएस)। जनजातीय अंचल में पीढ़ियों से अभिशाप बनी सिकलसेल एनीमिया की कड़ियां तोड़ने के लिए इंदौर संभाग ने अब एक निर्णायक लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में यह स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2047 तक इस बीमारी के समूल नाश के लिए इसे नई पीढ़ी में जाने से रोकना होगा। इसके लिए प्रशासन विवाह पूर्व जांच को एक जन-आंदोलन का रूप देगा। संभागायुक्त कार्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स और जिला पंचायतों के सीईओ उपस्थित थे। साथ ही अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य, संयुक्त आयुक्त विकास शिवानी वर्मा, उपायुक्त विकास पुरूषोत्तम पाटीदार, जनजातीय कार्य विभाग के उपायुक्त ब्रजेशचन्द्र पाण्डे सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने निर्देश दिए कि सिकलसेल पीड़ित या वाहक (केरियर) युवक-युवतियों के मध्य वैवाहिक संबंधों को टालने के लिए विशेष प्रचार-प्रसार किया जाए। सामूहिक विवाह सम्मेलनों में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से अनिवार्य स्क्रीनिंग और काउंसलिंग का नवाचार किया जाएगा, ताकि भावी संतान इस गंभीर अनुवांशिक बीमारी से मुक्त जन्म ले सके। :: अस्पतालों में हिटस्ट्रोक क्लीनिक :: बढ़ते तापमान और लू के खतरों को देखते हुए संभाग के सभी जिला एवं सिविल अस्पतालों में तत्काल हिटस्ट्रोक नियंत्रण क्लीनिक शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. खाड़े ने स्पष्ट किया कि भीषण गर्मी के इस दौर में आमजन को शुद्ध पेयजल और त्वरित उपचार उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अमृत 2.0 योजना का लाभ घर-घर पहुँचाने की ताकीद भी की गई। बोर्ड परीक्षाओं में आलीराजपुर और झाबुआ जैसे जनजातीय जिलों द्वारा परीक्षा परिणाम में 10 प्रतिशत की छलांग लगाने पर संभागायुक्त ने हर्ष व्यक्त किया। इस शैक्षणिक सुधार को स्थायी बनाने के लिए उन्होंने कमजोर विद्यार्थियों हेतु रेमेडियल कक्षाएं और छुट्टियों में जनजातीय युवाओं के लिए करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए। संभाग में अब तक 60 प्रतिशत से अधिक गेहूं की खरीदी पूर्ण हो चुकी है। उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए छाया, शुद्ध पेयजल और भोजन के चाक-चौबंद प्रबंध रखने के निर्देश दिए गए हैं। संभागायुक्त ने कहा कि बारदानों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और शेष लक्ष्य भी शीघ्र ही समयसीमा में पूरा कर लिया जाएगा। सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए टोल नाकों को निगरानी केंद्र बनाया जाएगा। एनएचएआई और एमपीआरडीसी के टोल गेटों पर हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्य जांच होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर टोल नाकों के समीप ही चिन्हांकित स्थलों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कुओं-बावड़ियों के पुनरुद्धार और अहिल्या लोक जैसे निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। संभागायुक्त ने राजस्व प्रकरणों, विशेषकर नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के मामलों को त्वरित गति से निराकृत करने के निर्देश देते हुए कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय लक्ष्य समयसीमा में ही पूरे होने चाहिए। प्रकाश/02 मई 2026