नई दिल्ली,(ईएमएस)। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय मूल के व्यक्ति का वीडियो काफी चर्चा बटोर रहा है, जिसमें उसने कनाडा और भारत के आईटी सेक्टर के कार्य परिवेश के बीच के बड़े अंतर को उजागर किया है। इस वीडियो ने प्रोफेशनल जगत में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। वीडियो में वह व्यक्ति कनाडा के एक ऑफिस का दृश्य दिखाते हुए बताता है कि वहां शाम 4:30 बजते ही कर्मचारी अपना काम समेटकर घर के लिए निकल जाते हैं। उसके अनुसार, विदेशों में समय पर ऑफिस छोड़ना एक सामान्य संस्कृति है, जहां लोग काम के बाद अपनी निजी जिंदगी और परिवार को प्राथमिकता देते हैं। कनाडा की तुलना भारत से करते हुए उस व्यक्ति ने बताया कि भारत के आईटी ऑफिसों में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। यहां कर्मचारियों को अक्सर 10 से 12 घंटे की लंबी शिफ्ट करनी पड़ती है। कई मामलों में तो कर्मचारी तब तक अपनी सीट नहीं छोड़ पाते, जब तक उनके वरिष्ठ अधिकारी या बॉस उन्हें जाने का संकेत न दे दें। वीडियो के मुताबिक, कनाडा में काम के बाद लोग अपने शौक पूरे करने, जिम जाने या घूमने के लिए स्वतंत्र होते हैं, जबकि भारत में काम के भारी दबाव और हर समय उपलब्ध रहने की अपेक्षा के कारण लोगों के पास खुद के लिए समय ही नहीं बचता। वीडियो का मुख्य संदेश यह है कि काम केवल आजीविका का साधन होना चाहिए, न कि पूरी जिंदगी का केंद्र। उस व्यक्ति ने सुझाव दिया है कि यदि भारत में भी काम के घंटों और ओवरटाइम को लेकर कड़े नियम लागू किए जाएं, तो यहां के कार्य परिवेश में बड़ा सुधार हो सकता है। इस वीडियो पर नेटिजन्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। जहां बड़ी संख्या में लोग विदेशी वर्क-कल्चर की तारीफ कर रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन ऑफिस कल्चर में आमूलचूल बदलाव की आवश्यकता है। यह वीडियो एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या निरंतर बढ़ता पेशेवर दबाव हमारी व्यक्तिगत खुशियों को निगल रहा है? वीरेंद्र/ईएमएस 03 मई 2026