- टियर-2, डॉर्मेंट खातों और विभिन्न निवेश स्कीम्स पर पड़ेगा सीधा असर नई दिल्ली (ईएमएस)। नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में निवेश करने वाले करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। पेंशन फंड रेगुलेटर पीएफआरडीए ने एनपीएस खातों पर लगने वाले सालाना मेंटेनेंस चार्ज (एएमसी) में बदलाव की घोषणा की है, जो जुलाई 2026 से लागू होंगे। 29 अप्रैल को जारी इस सर्कुलर का मकसद शुल्कों में एकरूपता लाना और मौजूदा विसंगतियों को दूर करना है। इन नए नियमों का सीधा असर आपके टियर-1, टियर-2 और निष्क्रिय (डॉर्मेंट) खातों पर पड़ेगा, जिससे आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग की लागत में बदलाव आ सकता है। टियर-1 और टियर-2 खाते हुए बराबर एनपीएस सब्सक्राइबर्स के लिए एक अहम बदलाव टियर-2 खातों से संबंधित है। अब तक टियर-1 और टियर-2 खातों के मेंटेनेंस चार्जेस में अंतर था, लेकिन पीएफआरडीए ने अब इन्हें एक समान कर दिया है। इसका अर्थ है कि टियर-2 खाते पर भी वही सालाना मेंटेनेंस चार्ज लगेगा जो उसी सेक्टर के टियर-1 खाते पर लागू होता है। यह उन निवेशकों के लिए मायने रखता है जो टियर-2 को बचत के एक लचीले विकल्प के तौर पर देखते थे, क्योंकि अब इसकी लागत बढ़ जाएगी। हालांकि, छोटे निवेशकों को राहत देते हुए, अगर किसी तिमाही के अंत में टियर-2 खाते का बैलेंस 1,000 रुपये या उससे कम है, तो कोई मेंटेनेंस चार्ज नहीं लिया जाएगा। हर स्कीम पर अलग चार्ज इसके अलावा पीएफआरडीए ने स्पष्ट किया है कि एक ही पीआरएएन (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) के तहत हर पेंशन स्कीम को अब एक अलग खाता माना जाएगा। इसका मतलब है कि यदि आपने इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी जैसी विभिन्न स्कीम्स में पैसा लगाया है, तो हर स्कीम पर अलग से मेंटेनेंस चार्ज लग सकता है। इससे उन निवेशकों की कुल लागत बढ़ सकती है जिन्होंने अपने निवेश को कई स्कीम्स में बांट रखा है। सतीश मोरे/03मई ---