अंतर्राष्ट्रीय
04-May-2026


ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक हलचल हुई तेज वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीति के मोर्चे पर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी कि उनके प्रतिनिधि ईरान के साथ सकारात्मक दिशा में बातचीत कर रहे हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ये चर्चाएं सक्रिय रूप से जारी हैं और इनके बहुत अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। ट्रंप का यह बयान दोनों देशों के बीच बने हुए कूटनीतिक जुड़ाव की ओर स्पष्ट संकेत देता है। अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने भी इन चर्चाओं की पुष्टि की है। विटकॉफ ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद का सिलसिला बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बातचीत का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र में जारी संघर्षों को समाप्त करने के लिए संभावित रास्तों की तलाश करना है। हालांकि, ट्रंप का यह रुख उनके पिछले बयानों की तुलना में थोड़ा नरम नजर आता है। हाल ही में उन्होंने ईरान के एक प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए उसे अस्वीकार्य बताया था। ट्रंप का मानना था कि ईरान ने अपने पिछले कृत्यों की अब तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। उन्होंने एक फोन कॉल के दौरान भी अपनी असंतुष्टि जाहिर करते हुए कहा था कि ईरान समझौता तो करना चाहता है, लेकिन उसकी शर्तें ऐसी हैं जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, ईरान ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका का जवाब मिल गया है। ईरान फिलहाल अमेरिका के नजरिए की बारीकी से समीक्षा कर रहा है और इसके बाद ही अपना अंतिम फैसला सुनाएगा। बघाई ने जोर देकर कहा कि ईरान का 14-सूत्रीय प्रस्ताव केवल क्षेत्रीय शांति और लेबनान सहित अन्य क्षेत्रों में युद्ध रोकने के लिए है, इसमें परमाणु मुद्दे का कोई जिक्र नहीं है। ईरान ने उन खबरों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाने का दावा किया गया था। तेहरान का कहना है कि वह किसी भी बाहरी दबाव या समय सीमा के भीतर बातचीत नहीं करेगा। उनके अनुसार, पहले युद्धविराम होना चाहिए और उसके बाद ही अन्य तकनीकी पहलुओं पर चर्चा संभव है। सुरक्षा की गारंटी के सवाल पर ईरान ने स्पष्ट किया कि वह दूसरे पक्ष के वादों के बजाय अपनी आंतरिक शक्ति पर अधिक भरोसा करता है। वीरेंद्र/ईएमएस/04मई 2026