-रक्षा, अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत सरकार ने विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर अपने नियमों को और सख्त कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा 2 मई को जारी अधिसूचना के मुताबिक अब पाकिस्तान से आने वाला कोई भी निवेश सीधे नहीं किया जा सकेगा। ऐसे सभी निवेशों के लिए सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। नए नियमों का असर न केवल पाकिस्तान बल्कि उन सभी देशों पर पड़ेगा जो भारत के साथ भूमि सीमा साझा करते हैं। नए नियमों के तहत पाकिस्तान के किसी भी नागरिक या वहां रजिस्टर्ड कंपनी को भारत में निवेश करने के लिए सरकार की मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पाकिस्तान से किसी भी तरह का निवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सरकार का साफ कहना है कि केवल गैर-संवेदनशील क्षेत्रों में ही ऐसे निवेश की अनुमति दी जा सकती है, वह भी कड़ी जांच के बाद। यह नियम केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले सभी देशों के निवेशकों पर भी यही शर्त लागू होगी। इसमें चीन, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान शामिल हैं। अगर किसी निवेश में ‘बेनिफिशियल ओनर’ यानी वास्तविक मालिक इन देशों का नागरिक है, तो उसे भी सरकारी मंजूरी के तहत ही निवेश करना होगा। इससे अप्रत्यक्ष निवेश पर भी नजर रखी जा सकेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी कंपनी के मालिकाना हक में बदलाव होता है और नया मालिक इन प्रतिबंधित देशों से जुड़ा होता है, तो इसके लिए भी पहले से सरकारी अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसका मतलब है कि कंपनियां अब निवेश के बाद भी अपनी संरचना में बदलाव करते समय पूरी तरह पारदर्शिता बनाए रखेंगी। इससे किसी भी तरह के बैकडोर निवेश को रोकने में मदद मिलेगी। दरअसल, भारत ने पहली बार अप्रैल 2020 में ऐसे नियम लागू किए थे, जब कोविड-19 के दौरान विदेशी कंपनियों द्वारा भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण का खतरा बढ़ गया था। उस समय उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने यह अनिवार्य किया था कि सीमावर्ती देशों से आने वाला हर निवेश सरकारी मंजूरी के तहत होगा। अब नए बदलाव उसी नीति को और मजबूत बनाते हैं और उसके दायरे को स्पष्ट करते हैं। एक तरफ जहां सरकार ने निवेश पर सख्ती बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर इंश्योरेंस सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई को ऑटोमैटिक रूट के तहत मंजूरी दे दी गई है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में ज्यादा विदेशी पूंजी लाना और विकास को तेज करना है। हालांकि, भारतीय जीवन बीमा निगम के लिए अलग नियम बनाए गए हैं, जहां विदेशी निवेश की सीमा 20 फीसदी तक ही रखी गई है। इससे यह साफ है कि सरकार संतुलन बनाते हुए संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों पर ध्यान दे रही है। सिराज/ईएमएस 04मई26