दावा- अब तक कम से कम 52 जहाजों ने अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ा तेहरान,(ईएमएस)। तेल परिवहन निगरानी फर्म ने बताया है कि ईरान का दूसरा विशाल कच्चा तेल वाहक पोत अमेरिकी नौसेना को सफलतापूर्वक चकमा देकर इंडोनेशिया के जलक्षेत्र से होते हुए रियाउ द्वीपसमूह की ओर बढ़ गया है। एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में कहा गया है कि डेयरिया नामक यह पोत इंडोनेशिया के लोम्बोक जलडमरूमध्य से गुजर रहा है। यह गतिविधि अप्रैल के मध्य में भारत को 1.88 मिलियन बैरल ईरानी कच्चे तेल की आपूर्ति करने के असफल प्रयास के बाद हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक टैंकर की गतिविधियों का विवरण देते हुए बताया गया है कि जहाज को दक्षिण की ओर बढ़ते हुए देखा, उस समय जब क्षेत्र में मौजूद उसके साथी जहाजों को अमेरिकी नौसेना द्वारा वापस ईरान भेजा जा रहा था। निगरानी समूह ने आगे बताया कि यह पोत वर्तमान में रियाउ द्वीपसमूह में अपने निर्धारित गंतव्य की ओर अग्रसर है। यह घटनाक्रम ट्रैकिंग फर्म द्वारा पहले किए गए खुलासे के बाद आया है कि एक अन्य ईरानी सुपरटैंकर भी अमेरिकी नौसेना को चकमा देने में सफल रहा था। 19 लाख बैरल तेल ले जा रहे उस जहाज को भी इसी तरह लोम्बोक जलडमरूमध्य में रियाउ क्षेत्र की ओर जाते हुए देखा गया था। निगरानी फर्म द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में करीब 25 टैंकर कच्चे तेल के साथ ईरान से रवाना हुए। इस बेड़े में से, अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक सात जहाजों को ईरानी बंदरगाहों की ओर वापस मोड़ दिया, जबकि अमेरिकी सेना ने दो अन्य टैंकरों को जब्त कर लिया। रिपोर्ट से पता चलता है कि अप्रैल में रवाना हुए शेष जहाज या तो अपने गंतव्य तक पहुंच चुके हैं या अपने तय स्थानों पर पहुंच गए हैं। इनमें नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का जहाज ह्यूज भी शामिल है, जो अमेरिकी नौसेना को चकमा देकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक पहुंचने में सफल रहा था। निगरानी फर्म ने बताया कि मलक्का जलडमरूमध्य से ईरान के लिए रवाना होने के बाद से इस जहाज ने स्वचालित पहचान प्रणाली पर कोई संचार नहीं किया है। ये निष्कर्ष 29 अप्रैल को ईरानी मीडिया द्वारा किए गए उन दावों से मेल खाते हैं कि कम से कम 52 जहाजों ने अमेरिकी नाकाबंदी को सफलतापूर्वक तोड़ दिया। इन कथित उल्लंघनों के बावजूद एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नाकाबंदी प्रभावी साबित हो रही है और इसके परिणामस्वरूप तेहरान को अरबों डॉलर के राजस्व का नुकसान हुआ है। वाशिंगटन का दावा है कि देश वर्तमान में तेल निर्यात करने में असमर्थ है और भंडारण क्षमता समाप्त होने और उत्पादन बंद होने तक अपने भंडार को जमा करने के लिए मजबूर होगा। सिराज/ईएमएस 04मई26