- सुबह से विधायक आवास के बाहर डटे रहे रहवासी - अंतिम नोटिस के बाद से दहशत आए लोग - प्रशासन पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप बालाघाट (ईएमएस). नगर के वार्ड 23 स्थित पावर हाउस कॉलोनी में बेदखली नोटिस के बाद हडक़ंप मच गया है। दहशत में जी रहे दर्जनों परिवार सोमवार को बच्चों और महिलाओं के साथ विधायक आवास पहुंच गए और पुनर्वास की मांग को लेकर घंटों इंतजार करते रहे। नगर मुख्यालय की पावर हाउस कॉलोनी के समीप रह रहे परिवारों पर बेदखली की तलवार लटक रही है। प्रशासन द्वारा जारी अंतिम नोटिस के बाद लोगों में भय और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं। सोमवार को पीडि़त परिवार विधायक अनुभा मुंजारे के आवास पहुंचे, जहां वे सुबह 10 बजे से दोपहर तक पेड़ के नीचे बैठे अपनी बारी का इंतजार करते रहे। रहवासियों का कहना है कि वे प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें हटाने से पहले रहने की वैकल्पिक व्यवस्था दी जानी चाहिए। उनका आरोप है कि पिछले 6 महीनों से लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं, लेकिन पुनर्वास को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई। 27 अप्रैल को जारी हुआ है अंतिम नोटिस जानकारी के अनुसार 27 अप्रैल को जारी अंतिम नोटिस में दो दिनों के भीतर मकान खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समय सीमा के बाद प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए मकानों को हटाया जाएगा। इसके बाद से ही क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। पीडि़तों का कहना है कि उन्होंने कई बार तहसीलदार और एसडीएम कार्यालय में अपनी समस्या रखी, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं। झूठे वादों से ठगा गया-पीडि़त स्थानीय महिला चित्ररेखा शेन्द्रे ने आरोप लगाया कि पहले प्रशासन ने पुनर्वास का भरोसा दिलाया, लेकिन बाद में कोई अधिकारी पलटकर नहीं आया। अब अचानक बुलडोजर चलाने की चेतावनी दी जा रही है, जिससे महिलाएं और बच्चे डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस भीषण गर्मी में वे लोग कहां जाएंगे। उन्होंने बड़ी मेहनत से अपनी जीवन की सामग्री एकत्रित की है और प्रशासन उसे एक झटके में उजाड़ रहा है। धरने जैसे हालात भीषण गर्मी के बीच छोटे-छोटे बच्चों के साथ पहुंचे परिवार घंटों पेड़ के नीचे बैठे रहे। दोपहर तक विधायक से मुलाकात नहीं हो सकी, जिससे लोगों में निराशा और नाराजगी बढ़ती गई। महिलाओं ने बताया कि वे सुबह से भूखे-प्यासे बैठे हैं, सिर्फ इस उम्मीद में कि उनकी बात सुनी जाएगी। पुनर्वास के बिना नहीं छोड़ेंगे घर रहवासियों ने साफ कहा है कि जब तक प्रशासन उन्हें रहने के लिए जमीन और उचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराता, वे अपने घर खाली नहीं करेंगे। उनका कहना है कि परिवार और बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहना संभव नहीं है। भानेश साकुरे / 04 मई 2026