ज़रा हटके
07-May-2026
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वाशिंगटन,(ईएमएस)। हेलमेट लगाकर वाहन चलाने का संदेश इसलिए दिया जाता है, ताकि सुरक्षित यात्रा हो। अपने जीवन की सुरक्षा के लिए लोग अच्छा खासा पैसा खर्च भी करते हैं, लेकिन क्या कोई हेलमेट हजार या लाख का नहीं करोड़ों का भी हो सकता है? तो बता दें कि जी हॉं ऐसे महंगे हेलमेट को फाइटर जेट के पायलट पहनते हैं। दरअसल एफ-35 फाइटर जेट का लाइटनिंग-2 वर्जन दुनिया का सबसे आधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट कहा जाता है। इस जेट के पायलट जो हेलमेट पहनते हैं, वह दुनिया का सबसे सोफिस्टिकेटेड वीयरेबल टेक्नोलॉजी वाला होता है, जो बड़े पैमाने पर सैन्य उपयोग के लिए तैयार किया गया है। यह सिर्फ पायलट के सिर की ही सुरक्षा नहीं करता, बल्कि पायलट के लिए पूरा कॉकपिट उसके चेहरे पर ला देता है। इस अद्भुद हेलमेट को हेलमेट माउंटेड डिस्पले सिस्टम (एचएमडीएस) कहा जाता है। इसमें छह कैमरे जेट के शरीर के चारों ओर देखने के लिए लगे होते हैं। ये कैमरे 360 डिग्री का पूरा नजारा लेते हैं और इस एक सिंगल, सीमलेस फीड में बदलकर हेलमेट के वाइजर पर प्रोजेक्ट कर देते हैं। इसका अर्थ यह हुआ, कि पायलट अगर नीचे देखता हैं, तब जेट के फ्लोर के पार से जमीन दिखाई देती है, जैसे जेट का फर्श पारदर्शी हो। पायलट बिना सिर घुमाए चारों तरफ देख सकता है। यही नहीं इस हेलमेट पर नाइट विजन, टारगेटिंग डेटा, फ्लाइट की स्पीड, ऊंचाई, खतरे की चेतावनी और अन्य जरूरी जानकारी सीधे वाइजर पर दिखाई देती है। ऐसे महज एक हेलमेट की कीमत करीब 4 करोड़ रुपये यानी 4 लाख डॉलर बताई गई है। यह कीमत इसलिए है क्योंकि हर हेलमेट पायलट के सिर के साइज के हिसाब से तैयार किया जाता है। इसमें हाई-रेजोल्यूशन लेजर स्कैनिंग, 3डी मॉडलिंग और स्पेशल फिटिंग की प्रक्रिया होती है, जिसमें दो दिन लग सकते हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाले एडवांस्ड कैमरा, सेंसर, कंप्यूटर प्रोसेसिंग और डिस्प्ले टेक्नोलॉजी भी बहुत महंगी है। बताया जाता है कि इसके पहले वर्जन (जेन-1और जेन-2) में काफी समस्याएं आईं थीं। इमेज में देरी, हिलने-डुलने की समस्या और रात में हरे रंग की चमक जैसी दिक्कतें आती थीं। इन समस्याओं को देखते हुए इसमें सुधार किया गया और कई साल की मेहनत रंग लाई। अब जेन-3 वर्जन वाले हेलमेट में ज्यादातर समस्याएं दूर हो चुकी हैं। यह हेलमेट फाइटर पायलटों के साथ जेट के इंटरैक्शन को पूरी तरह बदल देता है। पहले कॉकपिट पायलट के चारों ओर होता था, अब पूरा कॉकपिट पायलट के चेहरे पर ही मौजूद होता है। पायलट को हर स्थिति का 360 डिग्री अवेयरनेस मिलता है, जो वार के समय बहुत फायदेमंद बात है। इसके जरिए पायलट अपने दुश्मन को आसानी से ट्रैक कर सकता है और सटीक मिसाइल लांच करने में सफल हो सकता है। हिदायत/ईएमएस 07 मई 2026