राष्ट्रीय
07-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जहां ट्रेन के डिब्बों को रंग-बिरंगे पेंट से सजाया जाता है, वहीं उनके पहिए अक्सर बिना पेंट के ही नजर आते हैं? इसके पीछे की वजह काफी दिलचस्प और वैज्ञानिक है। दरअसल, ट्रेन के पहिए बहुत भारी दबाव और फ्रिक्शन (घर्षण) को झेलते हैं। जब ट्रेन तेज रफ्तार से पटरी पर दौड़ती है, तो पहियों और रेल ट्रैक के बीच लगातार रगड़ होती है। इस लगातार घर्षण के कारण अगर इन पहियों पर पेंट किया जाए, तो यह पेंट बहुत जल्दी घिसकर उतर जाएगा। ऐसे में बार-बार पेंट करना पड़ेगा, जो समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी साबित होगा। रेलवे ऐसी अनावश्यक लागत और रख-रखाव से बचने के लिए पहियों को पेंट करने से बचता है। इसके अलावा, सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद अहम कारण भी है। ट्रेन के पहियों में समय-समय पर छोटी दरारें, चिप्स या अन्य तकनीकी खामियां आ सकती हैं। बिना पेंट वाले पहियों में इन खामियों को पहचानना बहुत आसान होता है। इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी निरीक्षण के दौरान किसी भी छोटी दरार या नुकसान को तुरंत देख सकते हैं। अगर पहियों पर पेंट चढ़ा होगा, तो ये दरारें छिप सकती हैं, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाएगा और बड़ा हादसा होने का खतरा बढ़ सकता है। बिना पेंट की धातु की सतह पर कोई भी क्षति तुरंत दिखाई देती है, जो सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक और महत्वपूर्ण पहलू तापमान से जुड़ा है। ट्रेन के पहिए चलते समय काफी गर्म हो जाते हैं, खासकर जब ब्रेक लगाए जाते हैं या लंबी दूरी तय की जाती है। बिना पेंट के धातु की सतह पर तापमान में बदलाव को समझना और उसकी निगरानी करना आसान होता है, जबकि पेंट होने पर यह आकलन मुश्किल हो सकता है। यह तकनीकी निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाता है। कुल मिलाकर, ट्रेन के पहियों को बिना पेंट छोड़ा जाना कोई लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी और सुरक्षा से जुड़ी रणनीति है। यह रेलवे इंजीनियरिंग का एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण उदाहरण है जो दक्षता और सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता देता है। बता दें कि भारत में रेलवे सिर्फ एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा है। आज भी बड़ी संख्या में लोग ट्रेन से सफर करना पसंद करते हैं। किसी के लिए यह बजट फ्रेंडली ऑप्शन है, तो किसी के लिए आरामदायक और भरोसेमंद यात्रा का जरिया है। सुदामा/ईएमएस 07 मई 2026