नई दिल्ली (ईएमएस)। जबलपुर के बरगी डैम में अपनों को खोने वाले मसीह परिवार के सदस्यों के लिए यह हादसा ऐसा है, जिसकी टीस उन्हें जीवन भर महसूस होगी। इस त्रासदी ने दो पीढ़ियों को जख्म दिए हैं। जूलियस मसीह ने अपनी पत्नी को खोया, तो उनके दामाद प्रदीप ने अपनी जीवनसंगिनी और कलेजे के टुकड़े को। हादसे में जीवित बचे प्रदीप बताते हैं कि हम आखिरी पैसेंजर थे जो क्रूज पर चढ़े और हमारे जाते ही वह अपनी मंजिल की ओर बढ़ चला। बताया कि घटना से पहले क्रूज पर संगीत था, डांस था और खुशनुमा माहौल था। लेकिन बीच मझधार में अचानक मौसम ने करवट ली। तेज हवाएं चलने लगीं और क्रूज लहरों के थपेड़ों से डगमगाने लगा। प्रदीप बताते हैं कि जब पानी क्रूज के निचले हिस्से में बने कमरे में गेट से दाखिल होकर अंदर भरने लगा, तब हमें खतरे का एहसास हुआ। लाइफ जैकेट भी तैयार नहीं थे, वे पॉलिथीन में बंद थे। मैंने पॉलिथीन फाड़कर जैकेट निकाला और पत्नी को दिया। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/07/मई /2026