07-May-2026
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- प्रदेश के 136 नगरीय निकायों के विशेषज्ञों ने किया मंथन; शोधित जल का पुनरुपयोग अनिवार्य करने पर जोर :: इंदौर/भोपाल (ईएमएस)। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत प्रदेश के शहरों को पर्यावरण अनुकूल और कचरा मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। गुरुवार को भोपाल के होटल पलाश में आयोजित उपयोगित जल प्रबंधन कार्यशाला में सीवरेज प्रबंधन और जल शोधन की आधुनिक तकनीकों पर गहन विमर्श हुआ। कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने स्पष्ट किया कि शहरों की स्वच्छता और सौंदर्य के लिए नाला टैपिंग और जल शोधन में अत्याधुनिक तकनीकों के साथ प्रकृति का सामंजस्य अनिवार्य है। आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि सीवरेज प्रबंधन के लिए एसबीआर और बायोनेस्ट जैसी अत्याधुनिक तकनीकें जल प्रबंधन के लिए अत्यंत लाभदायक हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि मलजल शोधन संयंत्रों (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित जल का पुनरुपयोग सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने संयंत्र परिसरों में वायु शुद्धि के लिए पीपल जैसे प्राकृतिक शोधक पौधों के रोपण और नेचर-बेस्ड समाधानों को प्राथमिकता देने पर विशेष बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को सीवरेज प्रोजेक्ट्स की डिजाइन और ड्रॉइंग से जुड़ी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के निर्देश भी दिए। :: सटीक डिजाइन से मिलेगी सफलता :: अपर आयुक्त शिशिर गेमावत ने बताया कि मध्यप्रदेश स्वच्छता के क्षेत्र में देश के लिए अनुकरणीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन की परिकल्पना को साकार करने के लिए निर्माण की डिजाइन और ड्रॉइंग की सटीकता सबसे महत्वपूर्ण है। इसी ध्येय से प्रदेश के 136 नगरीय निकायों की तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा ने भी शोधित जल की गुणवत्ता बनाए रखने को अपरिहार्य बताया। :: विशेषज्ञों ने साझा की नाला टू क्लीन वॉटर तकनीक :: तकनीकी सत्र में वैज्ञानिक प्रोफेसर राजेश विनिवाल ने जल प्रबंधन के सूक्ष्म पहलुओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। वहीं, विशेषज्ञ कार्तिकेय तिवारी ने प्रदूषित नाले से स्वच्छ जल तक विषय पर नवीन तकनीकें साझा कीं। कार्यशाला में संभागीय कार्यपालन यंत्री, संयुक्त संचालक, पीडीएमसी टीम, डिजाइनर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन उप संचालक नीलेश दुबे ने किया। प्रकाश/07 मई 2026