लेख
08-May-2026
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की अभूतपूर्व जीत के बाद जिस तरह की हिंसा और तोड़फोड़ की वारदातों की झड़ी लगी है बेशक वो टीएमसी के दबंगई भरे डेड़ दशक के खिलाफ लोगों की नाराजगी और टीएमसी कार्यकर्ताओं की सत्ता छिटकने की हताशा की प्रतिक्रिया हो सकता है लेकिन दोनों राजनीतिक दलों को संयम और समझदारी और सदाचार बनाए रखने की जरूरत है। भाजपा को भाजपा बनाए रखने के लिए इस तरह की अराजकता फैलाने से अपने कार्यकर्ताओं को रोकना ही होगा हालांकि यह हिंसा एकतरफा नही है जिस तरह भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए की बीती रात अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर हत्या की है वह बताता है कि हिंसा और अराजकता का दौर अभी थमने वाला नहीं है। कानून व्यवस्था की स्थिति को सख्ती से सुधारना होगा चुनाव बाद हिंसा में चार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। मौजूदा चुनाव नतीजों के साथ ही नौ मई को भाजपा सरकार की ताजपोशी की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस चुनाव ने राज्य को राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। राज्य में यह सत्ता बदलने का संकेत नहीं है, बल्कि भारतीय राजनीति में एक बड़े वैचारिक और सामाजिक बदलाव की आहट भी हैं।जितना बडलंबे समय तक ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को बंगाल की राजनीति का सबसे मजबूत केंद्र माना जाता था।उधर कोलकाता में राज्य के पुलिस डीजीपी ने राज्य में चुनाव परिणाम के बाद आरही हिंसक वारदातों पर उपद्रवियों को कड़ी चेतावनी जारी की है दो सौ उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है जबकि चार लोगों की हिंसा में मौत हो गई है। पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद मंगलवार और बुधवार को हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। भाजपा और टीएमसी के पार्टी प्रतिनिधियों ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में पूरे पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई कथित झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई। आपको बता दें पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के सामने आने के बाद बुधवार (6 मई) देर रात शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या से हड़कंप मच गया है। अब तक की जांच में सामने आया है कि हत्या में इस्तेमाल की गई गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी। गोली लगने के बाद चंद्रनाथ रथ को विवासिटी हॉस्पिटल लाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या के मामले में एक के बाद एक चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। पुलिस सूत्रों का दावा है कि घटना रात 10 बजे से 10:15 बजे के बीच हुई। बताया जा रहा है कि हमले के समय गाड़ी की अगली सीट पर चंद्रनाथ रथ और उनका ड्राइवर मौजूद थे। पीछे की सीट पर मिंटू नाम का एक व्यक्ति बैठा था, जिसे चंद्रनाथ रथ का करीबी बताया जा रहा है।सूत्रों के मुताबिक जिस सिल्वर रंग की गाड़ी के जरिए चंद्रनाथ रथ की गाड़ी को रोका गया, उस गाड़ी के चेसिस नंबर मिटा दिए गए थे। यानि हमलावरों ने बहुत बारीकी से इस पूरे हत्याकांड की तैयारी की थी। जांच के फोकस में एक सिल्वर रंग की गाड़ी है, जिससे चंद्रनाथ रथ की गाड़ी को रोका गया था। रात तकरीबन 10 बजकर 20 मिनट पर चंद्रनाथ रथ की गाड़ी मेन हाईवे से उनके घर की गली की तरफ मुड़ी और घर से केवल 100 मीटर की दूरी पर इस गाड़ी को हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ की गाड़ी के सामने लगा दिया। इसके बाद बाइक पर सवार एक हमलावर जिसने कैप पहनी हुई थी, उतरता है और ताबड़तोड़ 4 राउंड फायरिंग की। जिसमें से 3 राउंड रथ के सीने में लगा जिससे उनकी मौत हो गई और उनके ड्राइवर की हालत नाजुक है। गौर करने वाली बात है कि चंद्रनाथ रथ वही शख्स हैं, जिन्होंने पिछले दिनों चुनाव के दौरान शुभेंदु अधिकारी का प्रतिनिधित्व करते हुए कई जगह देखे गए थे। जब ममता बनर्जी भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम में दाख़िल हुईं, तो चंद्रनाथ रथ बीजेपी समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए थे। चंद्रनाथ रथ (42) बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के सहायक थे। चंद्रनाथ, शुभेंदु गृह के जिले पूर्वी मिदनापुर के चांदीपुर के रहने वाले थे। चंद्रनाथ भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी हैं। उन्होंने साल 2019 में शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक के तौर पर काम शुरू किया था, जब शुभेंदु ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री थे। दिलचस्प बात यह है कि बंगाल चुनाव की मतगणना से ठीक तीन दिन पहले 30 अप्रैल को जब ममता बनर्जी शाख़ावत मेमोरियल हाई स्कूल स्थित भवानीपुर के स्ट्रॉन्ग रूम में दाख़िल हुईं, तो चंद्रनाथ रथ बीजेपी समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए थे। शुभेंदु अधिकारी की गैर-मौजूदगी में वे मतगणना केंद्र के बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे, क्योंकि शुभेंदु उस रात पूर्वी मिदनापुर स्थित अपने गृह नगर कांथी के लिए रवाना हो चुके थे। जैसा कि आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के बाद ये आशंका ज़ाहिर की जा रही थी कि हिंसक घटनाएं हो सकती हैं। राज्य में तोड़फोड़ और हिंसा की कई ख़बरें आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बयान जारी कर आरोप लगाया था कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लोग अपनी पहचान बदलकर ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के एक पार्टी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जहां उत्तरी 24 परगना के न्यू टाउन और हावड़ा के उदय नारायणपुर में भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई। वहीं टीएमसी ने कहा कि कोलकाता के बेलेघाटा और बीरभूम के नानूर में उसके दो सदस्यों की हत्या हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा कार्यकर्ता मधु मंडल की हत्या तब कर दी गई, जब वह न्यू टाउन में पार्टी की जीत की रैली में शामिल होने के बाद घर लौट रहे थे। हावड़ा के उदयनारायणपुर में भाजपा कार्यकर्ता यादव बार की हत्या कर दी गई। टीएमसी के प्रवक्ता जय प्रकाश मजूमदार ने कहा, अब तक हमारे दो कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है, एक बीरभूम में और दूसरा कोलकाता में। बीरभूम में, पीड़ित की पहचान पार्टी सदस्य अबीर शेख के रूप में हुई, जबकि बेलेघाटा में टीएमसी कार्यकर्ता बिस्वजीत पटनायक की हत्या कर दी गई पुलिस ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि ये मौतें राजनीति से जुड़ी थीं या नहीं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने, जिन्होंने अपना नाम न बताने की शर्त पर बात की, कहा कि कम से कम दो मामले राजनीतिक नहीं थे।अधिकारी ने कहा, शुरुआती जांच से पता चलता है कि हावड़ा में हुई हत्या राजनीतिक नहीं थी। यह निजी दुश्मनी के कारण हुई थी। बेलेघाटा में, पीड़ित छत से कूद गया, जब कुछ लोग उसे ढूंढते हुए उसके दरवाजे पर आए और वह भागने की कोशिश कर रहा था। कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय कुमार नंद ने कहा, कोलकाता के हॉग मार्केट में बुलडोजर से जुड़ी जो घटना हुई है, उस पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा, एक हत्या हुई है, लेकिन यह गैंगवार का मामला है। इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने कहा, चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और राज्य में तैनात केंद्रीय पुलिस बल को निर्देश दिया है कि वे राज्य में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति सुनिश्चित करें। उधर पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा को रोकने के लिए हस्तक्षेप की मांग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। हुमांयू कबीर ने आरोप लगाया कि 4 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद मुर्शिदाबाद जिले में बड़े पैमाने पर राजनीतिक रूप से प्रेरित और सुनियोजित हिंसा हुई है। अदालत में दायर याचिका में कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के घरों में तोड़फोड़ की गई और उनके कार्यकर्ताओं को पीटा गया। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ में मामला दायर कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनावी नतीजों के बाद जिस तरह की हिंसा सामने आई है, वह केवल कुछ बिखरी हुई घटनाओं का सिलसिला नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक संस्कृति के एक गहरे और जटिल संकट का संकेत है। यह परिघटना नई नहीं है; 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद भी इसी प्रकार की हिंसा ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गरिमा को गंभीर रूप से आहत किया था। किंतु इस बार स्थिति और अधिक विडंबनापूर्ण है, क्योंकि चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए थे और केंद्रीय बलों की व्यापक तैनाती ने मतदान प्रक्रिया को काफी हद तक निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त बनाए रखा था। इसके बावजूद नतीजों के बाद अचानक भड़की हिंसा यह प्रश्न खड़ा करती है कि समस्या केवल चुनावी प्रक्रिया में है, या उससे कहीं अधिक गहराई में—समाज और राजनीति की संरचना में निहित है।टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा न देने की बात कर अपने कार्यकर्ताओं को राज्य में असंतोष और अराजकता के लिए आगाह किया है राज्य में कानून व्यवस्था और सद्भाव बनाए रखने के लिए महती प्रयास करने की जरूरत है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) ईएमएस / 08 मई 26