-1918 से हो रही थी तलाश, 131 जिंदगियों की समुंद्र बन गया कब्र वाशिंगटन,(ईएमएस)। 26 सितंबर 1918 की शाम जब दक्षिणी इंग्लैंड के तट के पास एक जर्मन पनडुब्बी ने अमेरिका के जहाज को निशाना बनाया। दुश्मन की नजर में आते ही एक टॉरपीडो दागा गया। कुछ ही पलों में तेज धमाका हुआ और तीन मिनट में अमेरिका का जहाज ‘टाम्पा’ समंदर की गहराई में समा गया। जहाज पर सवार सभी 131 लोग समुंद्र में समा गए। बहुत तलाश हुई लेकिन समंदर ही उनकी कब्र बनकर रह गया। यह हादसा उस समय अमेरिकी सेना के लिए सबसे बड़ा नौसैनिक नुकसान था। इसके बाद सालों तक यह जहाज और उसमें सवार लोगों का कोई सुराग नहीं मिला। अब 107 साल बाद, इस कहानी का अधूरा अध्याय पूरा हो गया। ब्रिटेन की एक गोताखोर टीम ने कॉर्नवाल तट से करीब 80 किलोमीटर दूर 91 मीटर गहराई में इस मलबे को खोज निकाला। यह टीम पिछले तीन साल से लगातार इसकी तलाश कर रही थी। कई असफल कोशिशों के बाद आखिरकार उन्हें सफलता मिली। इतिहास में टाम्पा के शौर्य के बारे में बताया है। ‘टाम्पा’ उस दिन एक काफिले को सुरक्षा दे रहा था, लेकिन कोयले की कमी के कारण उसे बीच रास्ते से ही वेल्स की ओर लौटना पड़ा। इसी दौरान जर्मन पनडुब्बी यूबी-41 ने उस पर हमला कर दिया। टॉरपीडो के बाद हुए दूसरे विस्फोट ने जहाज को पूरी तरह तबाह कर दिया। इस जहाज में 111 अमेरिकी कोस्ट गार्ड कर्मी, 4 नौसेना के जवान और 16 ब्रिटिश नागरिक सवार थे। इन सभी की मौत ने उस समय पूरे अमेरिका को झकझोर दिया था। अब जब इस जहाज का मलबा मिल गया है, तो इसे शहीदों का अंतिम विश्राम स्थल माना जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह खोज उन लोगों की कुर्बानी को याद करने का एक अहम मौका है। जानकारी के मुताबिक आने वाले समय में आधुनिक तकनीक और रोबोट की मदद से इस मलबे का और गहराई से अध्ययन किया जाएगा। एक बात साफ है। समंदर ने 107 साल बाद सही, पर इतिहास का यह दर्दनाक सच आखिरकार दुनिया के सामने ला ही दिया है। प्रथम विश्व युद्ध का एक दर्दनाक रहस्य, जो एक सदी से भी ज्यादा समय तक समंदर की गहराइयों में छिपा रहा, वो दुनिया के सामने चीख-चीखकर अपनी कहानी कह रहा है। भले ही उसमें मौजूद लोगों का पता कभी नहीं चला लेकिन ये मलबा उनकी कहानियां कहता रहेगा। सिराज/ईएमएस 08 मई 2026