- शीतलनाथ जैन मंदिर में रजत जयंती ध्वजारोहण महोत्सव सौल्लास संपन्न; शिखर पर फहराया धर्म का प्रतीक :: इंदौर (ईएमएस)। ध्वजा चाहे मंदिर की हो या राष्ट्र की, उसका स्थान सदैव सर्वोच्च शिखर पर ही होता है। मंदिर के शिखर पर लहराती ध्वजा प्रभु की जीवंतता का साक्षात प्रमाण है। भगवान के दर्शन तो हर किसी को सहज रूप से उपलब्ध नहीं हो पाते, किंतु ध्वजा के दर्शन हर समय संभव हैं। यदि हम ध्वजा की भाँति भगवान की भक्ति, आज्ञा और आस्था से निरंतर जुड़े रहें, तो हमारा जीवन भी शिखर की ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। मंदिर और धर्म से जुड़ाव अनिवार्य है, अन्यथा संसार की विषय-वासनाओं की आंधी हमें कभी भी मार्ग से भटका और उड़ा देगी। द्वारकापुरी स्थित शीतलनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर के 25वें ध्वजारोहण महोत्सव के अवसर पर पंयास प्रवर योगरुचि विजय महाराज ने शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय नाहर, सुशील कुकड़ा एवं चेतन भंडारी ने बताया कि रजत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रातः बैंड-बाजों के साथ ध्वजाजी का भव्य वरघोड़ा निकाला गया। वर्धमान तपोनिधि प्रियदर्शन विजय, पंयास प्रवर योगरुचि विजय एवं नंदीरूचि विजय आदिठाणा के पावन सानिध्य में निकले इस जुलूस में सांसद शंकर लालवानी, समाजसेवी जयसिंह जैन, दिलीप सी जैन, भाजपा नेता दीपक जैन टीनू, विमल नाहर, राजेंद्र जैन और महापौर प्रतिनिधि भारत पारख सहित विभिन्न जैन श्रीसंघों के पदाधिकारी शामिल हुए। बग्घियों में सवार लाभार्थी परिजन समाज बंधुओं का अभिवादन कर रहे थे, जिनका मार्ग में स्थान-स्थान पर आत्मीय स्वागत किया गया। प्रारंभ में अमृत मूणत, विनोद कोठारी, रीतेश सेखावत, सतीश जैन, दिनेश धींग और नितिन बावेल सहित अन्य सदस्यों ने अतिथियों की अगवानी की। वरघोड़ा विभिन्न मार्गों से होता हुआ पुनः मंदिर पहुँचा, जहाँ विधिकर्ता आशीष जैन जावरा के निर्देशन में ध्वजारोहण की मांगलिक विधियां संपन्न हुईं। लाभार्थी परिवार के अरुण-संध्या, अभिषेक-लविना, अजय-अनिता पोरवाल सहित संजय नाहर एवं सुभाष चतर परिवार के सदस्यों ने हर्षोल्लास और भगवान शीतलनाथ के जयघोष के बीच शिखर पर केसरिया ध्वजा फहराई। इस दौरान समूचा परिसर तीर्थंकरों के जयघोष से गुंजायमान रहा। ट्रस्ट मंडल द्वारा सांसद शंकर लालवानी एवं अन्य अतिथियों सहित लाभार्थी परिवारों का स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया। आयोजन में वीरमणि युवामित्र मंडल, शीतलनाथ महिला मंडल और सामायिक मंडल का विशेष सहयोग रहा। नार्मदीय ब्राह्मण धर्मशाला पर स्वामी वात्सल्य के साथ इस छह दिवसीय दिव्य महोत्सव का समापन हुआ। उल्लेखनीय है कि 24 वर्ष पूर्व आचार्य जयघोष सूरीश्वर एवं आचार्य वीररत्न सूरीश्वर के सानिध्य में यहाँ ध्वजा की स्थापना की गई थी। अंत में सचिव चेतन भंडारी ने आभार माना। प्रकाश/08 मई 2026