मनोरंजन
09-May-2026
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मुंबई (ईएमएस)। वर्षों की साधना, समर्पण और मेहनत के दम पर नृत्यांगना लीला सैमसन ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में नई पहचान दिलाई। उन्होंने भरतनाट्यम को केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। एक कलाकार, गुरु और प्रशासक के रूप में उनका योगदान भारतीय कला जगत में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लीला सैमसन का जन्म 6 मई 1951 को तमिलनाडु के कूनूर में हुआ था। उनके पिता बेंजामिन अब्राहम सैमसन भारतीय नौसेना में अधिकारी थे, जबकि उनकी मां लैला को संगीत और कला से विशेष लगाव था। परिवार का सांस्कृतिक माहौल ही ऐसा था कि बचपन से ही लीला का झुकाव कला की ओर होने लगा। उनकी मां ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जब लीला सैमसन मात्र नौ वर्ष की थीं, तब उनके पिता ने उन्हें चेन्नई के प्रसिद्ध कला संस्थान ‘कलाक्षेत्र’ में दाखिला दिलाया। यहीं से उनके जीवन की असली यात्रा शुरू हुई। उन्होंने महान नृत्य गुरु रुक्मिणी देवी अरुंडेल से भरतनाट्यम की शिक्षा प्राप्त की। कलाक्षेत्र में बिताए गए वर्षों ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को पूरी तरह बदल दिया। इसी दौरान उन्होंने तय कर लिया था कि वह अपना पूरा जीवन नृत्य और कला को समर्पित करेंगी। पढ़ाई के साथ-साथ लीला सैमसन ने नृत्य की साधना लगातार जारी रखी। समय के साथ उनकी प्रतिभा निखरती गई और वह एक उत्कृष्ट भरतनाट्यम नृत्यांगना के रूप में पहचानी जाने लगीं। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने दिल्ली के श्रीराम भारतीय कला केंद्र और गंधर्व महाविद्यालय में छात्रों को भरतनाट्यम सिखाया। उनकी शिक्षण शैली और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें एक सफल गुरु के रूप में भी स्थापित किया। धीरे-धीरे लीला सैमसन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका सहित कई देशों में मंच प्रस्तुतियां दीं और भारतीय शास्त्रीय नृत्य को वैश्विक मंच पर पहुंचाया। उनकी प्रस्तुतियों में पारंपरिकता के साथ गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति देखने को मिलती थी, जिसने दर्शकों को हमेशा प्रभावित किया। साल 1995 में उन्होंने ‘स्पंदा’ नाम से एक डांस ग्रुप की स्थापना की। इसका उद्देश्य भरतनाट्यम को नए अंदाज में प्रस्तुत करना और नई पीढ़ी को इस कला से जोड़ना था। उन्होंने अनेक छात्रों को प्रशिक्षण दिया, जिनमें से कई आगे चलकर प्रसिद्ध कलाकार बने। लीला सैमसन ने कला के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी बखूबी निभाईं। वह 2005 से 2012 तक कलाक्षेत्र की निदेशक रहीं। इसके अलावा उन्होंने संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सीबीएफसी की प्रमुख के रूप में भी कार्य किया। इन पदों पर रहते हुए उन्होंने कला और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। भारतीय कला जगत में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पद्मश्री सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। सुदामा/ईएमएस 09 मई 2026