नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय एयरलाइंस में जब एयर होस्टेस हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए “नमस्ते” कहती हैं, तो यह दृश्य यात्रियों को भारतीय संस्कृति और आतिथ्य की याद दिलाता है। हाल ही में इसके पीछे की असली वजह सामने आई है। एक फ्लाइट अटेंडेंट ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर बताया कि हाथ जोड़कर नमस्ते करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रोफेशनल सुविधा से भी जुड़ा हुआ है। फ्लाइट अटेंडेंट के अनुसार, हाथ मिलाने की बजाय नमस्ते करने के पीछे सबसे बड़ी वजह हाइजीन और स्वास्थ्य सुरक्षा है। एक विमान में हर दिन सैकड़ों यात्री सफर करते हैं। ऐसे में अगर क्रू मेंबर्स हर यात्री से हाथ मिलाएं, तो जर्म्स और वायरस फैलने का खतरा काफी बढ़ सकता है। कोविड महामारी के बाद एयरलाइंस इस मामले में और अधिक सतर्क हो गई हैं। नमस्ते में किसी तरह का शारीरिक संपर्क नहीं होता, इसलिए संक्रमण फैलने की संभावना काफी कम रहती है। यही कारण है कि अब कई एयरलाइंस बिना टच वाले अभिवादन को प्राथमिकता दे रही हैं। इसके अलावा नमस्ते करने का एक महत्वपूर्ण कारण यात्रियों को ध्यान से देखना भी है। जब एयर होस्टेस हाथ जोड़कर स्वागत करती हैं, तब वे यात्रियों के चेहरे, हावभाव और व्यवहार को बारीकी से समझने की कोशिश करती हैं। इससे उन्हें तुरंत पता चल जाता है कि कोई यात्री घबराया हुआ है, अस्वस्थ महसूस कर रहा है, नशे में है या किसी तरह का संदिग्ध व्यवहार कर रहा है। विमान सुरक्षा के लिहाज से यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बोर्डिंग के समय क्रू मेंबर्स केवल स्वागत ही नहीं करतीं, बल्कि हर यात्री का अवलोकन भी करती हैं। भारतीय एयरलाइंस के लिए नमस्ते उनकी सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के सामने भारतीय परंपरा और मेहमाननवाजी दिखाने के लिए यह तरीका काफी प्रभावी माना जाता है। विदेशी यात्री भी इस अभिवादन को खास और यादगार अनुभव के रूप में देखते हैं। यही वजह है कि भारतीय एयरलाइंस अपने ब्रांड इमेज में नमस्ते को प्रमुखता देती हैं। फ्लाइट अटेंडेंट्स का कहना है कि लंबी उड़ानों में लगातार सैकड़ों यात्रियों से हाथ मिलाना शारीरिक रूप से भी थकाऊ हो सकता है। ऐसे में नमस्ते करना एक आसान, सम्मानजनक और प्रोफेशनल तरीका साबित होता है। दुनिया की कई विदेशी एयरलाइंस आज भी “हैलो” या हैंडशेक का इस्तेमाल करती हैं, जबकि भारतीय एयरलाइंस नमस्ते के जरिए अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। सुदामा/ईएमएस 09 मई 2026