राष्ट्रीय
09-May-2026
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कोलकाता(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज शनिवार को एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और जायंट किलर के रूप में अपनी पहचान बना चुके शुभेंदु अधिकारी वर्ष 2021 और 2026 के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी को कड़ी शिकस्त देने के बाद शुभेंदु का कद राजनीति में और भी ऊंचा हो गया है। आज जब वे सत्ता के शीर्ष पर पहुँच रहे हैं, तो उनके राजनीतिक कौशल के साथ-साथ उनके निजी जीवन और अविवाहित रहने के उनके फैसले की भी खूब चर्चा हो रही है। 55 वर्षीय शुभेंदु अधिकारी के अविवाहित रहने को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। करीब छह साल पहले हल्दिया में एक जनसभा के दौरान उन्होंने खुद इस राज से पर्दा उठाया था। शुभेंदु ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि लोग अक्सर उनके भाइयों के विवाहित होने और उनके अकेले रहने पर सवाल करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आज के दौर के पारंपरिक राजनेताओं की तरह नहीं हैं। उनके लिए पूरा बंगाली समाज ही उनका परिवार है। शुभेंदु ने बताया कि वे महान स्वतंत्रता सेनानियों सतीश सामंता, सुशील धारा और अजय मुखर्जी के आदर्शों पर चलते हैं, जो आजीवन अविवाहित रहे और अपना पूरा जीवन समाज सेवा में झोंक दिया। शुभेंदु के इस फैसले पर उनके पिता और वरिष्ठ नेता शिशिर अधिकारी शुरुआत में काफी नाराज थे। शिशिर अधिकारी ने एक पुराने साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि उन्होंने शुभेंदु को शादी न करने के लिए काफी डांटा था। एक पिता के तौर पर वे चाहते थे कि उनके बेटे का भी अपना परिवार और घर-संसार हो, लेकिन शुभेंदु के दृढ़ निश्चय के आगे उन्हें झुकना पड़ा।स्वयं शुभेंदु का मानना है कि अविवाहित होने का राजनीति में एक सकारात्मक पक्ष भी है। उनके अनुसार, परिवार की जिम्मेदारी न होने के कारण उन्हें जनता की सेवा के लिए अधिक समय मिलता है। वे शक्ति के गलत इस्तेमाल और परिवारवाद की राजनीति से दूर रहकर केवल जनहित पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका यह समर्पित सफर आज उन्हें मुख्यमंत्री आवास तक ले आया है। राज्य की जनता को अब अपने इस समर्पित मुख्यमंत्री से काफी उम्मीदें हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/09मई 2026