राष्ट्रीय
09-May-2026
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3 महीने में हुईं 2 गुप्त बैठकें, एनएसए डोभाल भी सक्रिए नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष बीत जाने के बाद, दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने की एक नई और गोपनीय कोशिश शुरू हुई है। हालांकि दोनों देशों के बीच फिलहाल कोई आधिकारिक राजनयिक संपर्क नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे बातचीत का रास्ता खोलने की जिम्मेदारी सेना के सेवानिवृत्त जनरलों और पूर्व राजनयिकों ने संभाली है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में कतर और एशिया के एक अन्य देश की राजधानी में कम से कम दो बार गुप्त बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। यद्यपि ये मुलाकातें पूरी तरह अनौपचारिक हैं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह संवाद की पहली ठोस कोशिश मानी जा रही है। भारतीय सरकारी हलकों में इस बात पर आम सहमति बनती दिख रही है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी के साथ संचार का एक गुप्त रास्ता खुला रहना चाहिए। इस पहल की जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को दे दी गई है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से भी इस तरह की बातचीत को लेकर सकारात्मक इच्छा जताई गई है। इस गुप्त वार्ता का मुख्य उद्देश्य भविष्य में किसी भी संभावित आतंकी हमले या आकस्मिक संकट की स्थिति में तनाव को अनियंत्रित होने से रोकना है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच केवल सैन्य संचालन महानिदेशक स्तर पर साप्ताहिक हॉटलाइन ही एकमात्र जरिया है। भारत का मानना है कि इस तरह का बैक-चैनल संचार उसकी उस घोषित नीति का उल्लंघन नहीं करता, जिसमें कहा गया है कि आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। इसे एक ऐसी आपातकालीन व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है, जिससे संकट के समय सीधे नेतृत्व से संपर्क साधा जा सके। इस संवाद की आवश्यकता के पीछे भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी अहम हैं। वर्तमान में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की स्थिति मजबूत हुई है और उन्हें अमेरिकी प्रशासन का समर्थन भी प्राप्त है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के साथ-साथ भारत के लिए अपना स्वतंत्र संचार मार्ग रखना कूटनीतिक रूप से जरूरी है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आसिम मलिक को नया एनएसए नियुक्त किया गया है, जो आईएसआई प्रमुख का पद भी संभाल रहे हैं। सैन्य और नागरिक शक्तियों के इस एकीकरण ने पाकिस्तान में सत्ता के केंद्र को स्पष्ट कर दिया है, जिससे भारत के लिए सीधे संवाद की आवश्यकता और बढ़ गई है। वीरेंद्र/ईएमएस/09मई 2026