राज्य
09-May-2026


अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात में तेज रफ्तार अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट ने राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में गुजरात में 15,500 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 7,717 लोगों की मौत हो गई। यानी राज्य में हर दिन औसतन 21 से ज्यादा लोग सड़क हादसों का शिकार होकर अपनी जान गंवा रहे हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात के चार प्रमुख शहरों में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। अहमदाबाद में सबसे ज्यादा 1,586 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 410 लोगों की मौत हुई। सूरत में 659 दुर्घटनाओं में 314 लोगों की जान गई, जो अन्य शहरों की तुलना में बेहद ऊंची मृत्यु दर को दर्शाता है। वडोदरा में 557 हादसों में 183 लोगों की मौत दर्ज की गई। राजकोट में 416 दुर्घटनाओं में 160 लोगों ने जान गंवाई। आंकड़े साफ बताते हैं कि हादसों की संख्या के मामले में अहमदाबाद सबसे आगे है, जबकि सूरत में दुर्घटना के मुकाबले मौतों का अनुपात सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला है। एनसीआरबी रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि राज्य में होने वाले कुल सड़क हादसों में 82 प्रतिशत दुर्घटनाओं के पीछे ओवरस्पीडिंग मुख्य कारण है। तेज रफ्तार की लापरवाही निर्दोष लोगों की जिंदगी छीन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, सड़क पर लापरवाह ड्राइविंग और नियंत्रण से अधिक गति से वाहन चलाना दुर्घटनाओं को लगातार बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें दोपहिया वाहन चालकों की हुई हैं। वर्षभर में कुल 3,365 बाइक और स्कूटर चालकों ने अपनी जान गंवाई। हेल्मेट नहीं पहनना, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और तेज गति से वाहन चलाना इन मौतों के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। सड़क सुरक्षा को लेकर बढ़ती लापरवाही अब राज्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। सतीश/09 मई