क्षेत्रीय
09-May-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। भारतेन्दु साहित्य समिति, बिलासपुर के संयोजन में लखीराम ऑडिटोरियम में शहर के वरिष्ठ साहित्यकार बुधराम यादव के गीत संग्रह ‘गीत मुक्ति का प्रथम प्रणव है’ का विमोचन समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, भाषा और गीत विधा पर केंद्रित सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं माल्यार्पण के साथ हुई। अतिथियों का स्वागत शाल एवं श्रीफल भेंटकर किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि जांजगीर से पधारे वरिष्ठ छंदकार एवं सजल-ऋषि ईश्वरी प्रसाद यादव थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष, भाषाविद एवं ठावे विश्वविद्यालय गोपालगंज (बिहार) के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार विजय राठौर तथा वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी देवधर महंत उपस्थित रहे। वहीं सिवना प्रकाशन, सीहोर (मध्यप्रदेश) के प्रतिनिधि के रूप में शहरयार खान मंचासीन रहे। - दो सत्रों में हुआ आयोजन कार्यक्रम को दो सत्रों में विभाजित किया गया था। पहले सत्र की शुरुआत वरिष्ठ गीतकार विजय तिवारी के स्वागत भाषण से हुई। पुस्तक विमोचन के बाद अपने उद्बोधन में साहित्यकार बुधराम यादव ने अपने जीवन के आठ दशकों के संघर्ष, साहित्यिक यात्रा और सृजन अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने नवप्रकाशित गीत संग्रह से कुछ गीतों का पाठ भी किया। उल्लेखनीय है कि बुधराम यादव पिछले करीब 50 वर्षों से साहित्य सृजन में सक्रिय हैं और हिंदी तथा छत्तीसगढ़ी दोनों भाषाओं में समान अधिकार रखते हैं। यह उनकी नौवीं प्रकाशित पुस्तक है। - साहित्यकारों ने रचनात्मकता की सराहना की विशिष्ट अतिथि विजय राठौर ने पुस्तक के तकनीकी पक्षों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बुधराम यादव को समर्थ रचनाकार बताया। वहीं देवधर महंत ने उनकी दीर्घ साहित्यिक यात्रा और समर्पण को प्रेरणादायी बताया। मुख्य अतिथि ईश्वरी प्रसाद यादव ने काव्य और उसके तत्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बुधराम यादव की रचनाओं में काव्य के सभी आवश्यक तत्व विद्यमान हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि हिंदी साहित्य के आरंभिक दौर से ही गीत विधा की अपेक्षाकृत अनदेखी होती रही है। उन्होंने कहा कि काव्य और गीत दोनों की अपनी अलग-अलग पहचान और संरचना है। - गीतों की प्रस्तुति ने बांधा समां कार्यक्रम के दूसरे सत्र में रायपुर से आए वरिष्ठ साहित्यकार एवं भाषाविद चितरंजन कर ने बुधराम यादव के गीतों को संगीतबद्ध कर प्रस्तुत किया। उनकी मधुर गायकी और प्रस्तुति ने उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन शत्रुघ्न घृतलहरे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन केवल कृष्ण पाठक ने किया। समारोह में शहर के अनेक साहित्यकार, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। - 09 मई 2026