राज्य
09-May-2026
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भोपाल (ईएमएस)। एम्स भोपाल लगातार समाज के कमजोर और वंचित वर्गों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने तथा बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में एम्स भोपाल ने छिंदवाड़ा जिले में प्रारंभिक बाल विकास विषय पर प्रशिक्षण-सह-हितधारक बैठक का आयोजन किया। यह कार्यक्रम आईसीएमआर द्वारा वित्तपोषित परियोजना “सर्वाइव टू थ्राइव – मध्य प्रदेश के शहरी, ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों के वंचित बच्चों के विकासात्मक परिणामों में सुधार हेतु कार्यान्वयन शोध: मिश्रित विधियों पर आधारित हस्तक्षेप अध्ययन” के अंतर्गत आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास से जुड़ी समस्याओं को समझना तथा विभिन्न विभागों के सहयोग से ऐसे उपाय तैयार करना था, जिससे बच्चों का विकास बेहतर हो सके। बैठक के उद्घाटन सत्र में डॉ. सुशील दुबे (सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय छिंदवाड़ा), बृजेश शिवहरे (जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, छिंदवाड़ा), डॉ. धीरज दवांदे (जिला स्वास्थ्य अधिकारी, छिंदवाड़ा), शैलेन्द्र सोमकुवर (जिला कार्यक्रम प्रबंधक) तथा मनोज कुमार राय (डीसीएम, छिंदवाड़ा) उपस्थित रहे। इसके अलावा आरबीएसके, सीपीएचसी, डीसीएम इकाइयों के सदस्य तथा जिला स्वास्थ्य टीम के पर्यवेक्षकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। सभी अतिथियों ने बच्चों के बेहतर विकास के लिए मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वैज्ञानिक सत्रों का संचालन डॉ. दीप्ति डाबर (प्रधान अन्वेषक एवं अतिरिक्त प्राध्यापक, सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग, एम्स भोपाल) ने किया। उन्हें डॉ. रूपेश साहू (सह-अन्वेषक एवं सह प्राध्यापक, सामुदायिक चिकित्सा विभाग, छिंदवाड़ा आयुर्विज्ञान संस्थान) का सहयोग प्राप्त हुआ। डॉ. रूपेश साहू ने बताया कि एनीमिया, आयोडीन की कमी और कुपोषण जैसी समस्याएं बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को शुरुआती उम्र से सही पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और देखभाल मिले तो उनके विकास में काफी सुधार किया जा सकता है। परियोजना के उद्देश्य, कार्ययोजना और आगे की रणनीति पर विस्तृत जानकारी डॉ. दीप्ति डाबर और डॉ. नेहा गुप्ता द्वारा दी गई। वहीं श्रीमती स्वागता आद्यालकर ने माताओं, देखभालकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों में प्रसवकालीन अवसाद के प्रति जागरूकता की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रारंभिक बाल विकास, विकास निगरानी, उत्तरदायी देखभाल, बच्चों के मानसिक विकास के लिए प्रारंभिक गतिविधियां तथा स्वास्थ्य और आईसीडीएस सेवाओं के बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि जीवन के शुरुआती वर्षों में बच्चों को सही पोषण, प्यार, सुरक्षित वातावरण और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलना उनके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह बैठक छिंदवाड़ा जिले के वंचित बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ईएमएस/09/05/20263