राष्ट्रीय
09-May-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। वैज्ञानिकों ने केदारनाथ के मौजूदा पैदल मार्ग को बेहद संवेदनशील और असुरक्षित बताया है। हालिया शोध में खुलासा हुआ है कि लिंचोली से रुद्र प्वाइंट तक करीब चार से पांच किलोमीटर का इलाका हिमस्खलन के लिहाज से सबसे ज्यादा खतरनाक बना हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में ग्यारह सक्रिय हिमस्खलन मार्ग मौजूद हैं, जहां ऊंची चोटियों से लगातार बर्फ, चट्टानें और बड़े पत्थर नीचे गिरते रहते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि हर मिनट करीब एक सौ से दो सौ तीर्थयात्री इसी संवेदनशील क्षेत्र से गुजरते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, ग्लेशियरों पर बढ़ता दबाव, लगातार बढ़ रही तीर्थयात्रियों की संख्या और तेजी से हो रहा निर्माण कार्य हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहा है। यही वजह है कि हिमस्खलन की घटनाएं पहले के मुकाबले अधिक खतरनाक होती जा रही हैं। वर्ष 2013 की भीषण आपदा के बाद पुराना पैदल मार्ग पूरी तरह नष्ट हो गया था, जिसके बाद नया मार्ग तैयार किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान मार्ग दक्षिण दिशा में होने के कारण यहां धूप कम पहुंचती है और ग्लेशियर अधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे जोखिम बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि रोपवे परियोजना को प्राथमिकता दी जाए और पुराने सुरक्षित मार्ग को फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित बनाई जा सके। सुबोध/०९-०५-२०२६