राष्ट्रीय
09-May-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। विधानसभा चुनाव में उन्होंने गांव-गांव, गली-गली जाकर पार्टी के लिए जमकर प्रचार किया, जनसभाएं कीं और विपक्ष पर तीखे हमले भी बोले। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज थी कि सत्ता परिवर्तन के बाद मिथुन चक्रवर्ती को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री और मंत्रीमंडल दोनों से उनका नाम बाहर रहा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मिथुन चक्रवर्ती ने कोई पद क्यों नहीं लिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मिथुन चक्रवर्ती हमेशा खुद को पद से ज्यादा जनसेवा से जोड़कर पेश करते रहे हैं। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा है कि उनका मकसद गरीबों और वंचितों के लिए काम करना है, न कि सत्ता का सुख लेना। मिथुन चक्रवर्ती का राजनीतिक सफर भी बेहद दिलचस्प रहा है। युवावस्था में वह वामपंथी विचारधारा से जुड़े रहे और तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु के करीबी माने जाते थे। बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का साथ दिया और उच्च सदन तक पहुंचे, लेकिन बाद में सक्रिय रूप से भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ गए। वर्ष2021 से लेकर 2026 तक बंगाल के चुनावी मैदान में मिथुन चक्रवर्ती पार्टी के सबसे प्रभावशाली प्रचारकों में रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी नजदीकी भी कई बार सार्वजनिक मंचों पर दिखाई दी। इसके बावजूद उन्होंने न मुख्यमंत्री पद की दौड़ में खुद को रखा और न मंत्री बनने की कोई कोशिश की। राजनीतिक संकेत साफ हैं—मिथुन चक्रवर्ती फिलहाल सत्ता नहीं, बल्कि जनाधार और सामाजिक प्रभाव को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाए रखना चाहते हैं। सुबोध/०९-०५-२०२६