क्षेत्रीय
09-May-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। केदारनाथ के पैदल मार्ग पर लिंचोली से रुद्र पॉइंट तक का इलाका हिमस्खलन यानी एवलांच की दृष्टि से बेहद संवेदनशील और खतरनाक माना जा रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस पूरे क्षेत्र में लगभग 4 से 5 किलोमीटर का हिस्सा सबसे अधिक जोखिम वाला है, जहां हर समय हिमस्खलन का खतरा बना रहता है। खासकर लिंचोली के आसपास करीब 4 किलोमीटर लंबे मार्ग में 11 सक्रिय एवलांच सूट मौजूद हैं, जिनसे लगातार बर्फ, पत्थर और बड़े-बड़े बोल्डर नीचे गिरते रहते हैं। वैज्ञानिकों ने हाल ही में जारी अपने रिसर्च पेपर में इस खतरे को गंभीर बताते हुए कहा है कि केदारनाथ यात्रा मार्ग पर तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि केदारनाथ रोपवे परियोजना पर तेजी से काम किया जाए और पुराने पैदल मार्ग को दोबारा शुरू करने पर विचार किया जाए, ताकि यात्रियों का दबाव मौजूदा खतरनाक मार्ग से कम किया जा सके। वैज्ञानिकों के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बर्फ जमा रहती है, जिससे एवलांच की संभावना लगातार बनी रहती है। इसके बावजूद कई तीर्थ यात्री एवलांच जोन में रुककर फोटो और वीडियो बनाते नजर आते हैं। कई बार पुलिस और प्रशासन लोगों को इन संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी देते हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग जोखिम उठाते दिखाई देते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन हिमस्खलनों की लंबाई लगभग डेढ़ किलोमीटर तक और चौड़ाई 100 से 200 मीटर तक हो सकती है। अनुमान है कि हर मिनट करीब 100 से 200 तीर्थ यात्री इस संवेदनशील क्षेत्र से गुजरते हैं। ऐसे में किसी बड़े हिमस्खलन की स्थिति में भारी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में दो अलग-अलग हिमस्खलन मार्ग आसपास की धाराओं से मिलते हैं, जिससे एक बड़ा और अधिक विनाशकारी प्रवाह बनता है। लगातार बढ़ता तापमान, ग्लेशियरों पर दबाव, पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं। रिसर्च में स्थान-विशेष के अनुसार खतरे की मैपिंग, सतत विकास और एवलांच जोखिम के सक्रिय प्रबंधन की तत्काल जरूरत बताई गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लिंचोली से रुद्र पॉइंट तक का मार्ग भविष्य में गंभीर आपदा का कारण बन सकता है, इसलिए सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। ईएमएस / 09/05/2026