10-May-2026
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रियाद,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में फिर युद्ध जैसे हालात बने हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य तनाव के बाद अब ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच भी टकराव सामने आया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने यूएई पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोन से बड़ा हमला किया, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में दहशत फैल गई। हालांकि यूएई की अत्याधुनिक एयर डिफेंस प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट किया, लेकिन हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हैं। सूत्रों के मुताबिक, ईरान की ओर से देर रात एक साथ कई मिसाइलें और ड्रोन दागे गए। राजधानी अबू धाबी और दुबई सहित कई महत्वपूर्ण इलाकों में सायरन गूंज उठे। हमले के बाद यूएई की नेशनल इमरजेंसी क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने देशभर में हाई अलर्ट जारी किया। लोगों से घरों, सुरक्षित बंकरों और शेल्टर में रहने की अपील की गई है। साथ ही प्रशासन ने नागरिकों को सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से दूर रहने और केवल सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी है। यह हमला तब हुआ है जब कुछ ही सप्ताह पहले अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी। 8 अप्रैल को हुए संघर्ष विराम के बाद माना जा रहा था कि क्षेत्र में तनाव कम होगा, लेकिन एक महीने के भीतर ही हालात फिर विस्फोटक हो गए। सोमवार को भी ईरान ने यूएई की ओर 15 मिसाइलें और चार ड्रोन दागे थे, जिसकी दुनिया के कई देशों ने निंदा की थी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वैश्विक नेताओं ने क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया था। यूएई सरकार अब मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी कर रही है। हमलों से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक हाई-पावर कमेटी बनाई गई है, जिसकी अगुवाई यूएई के अटॉर्नी जनरल कर रहे है। यह समिति हमलों से जुड़े तकनीकी सबूत, तस्वीरें और रिपोर्ट एकत्र करेगी ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान के खिलाफ मजबूत मामला पेश किया जा सके। जरूरत पड़ने पर विदेशी विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी। आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे संघर्ष के दौरान ईरान अब तक 2000 से अधिक ड्रोन और सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कर चुका है। एयर डिफेंस सिस्टम की सक्रियता के बावजूद अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमलों में यूएई के तेल और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है। फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है। लगातार मिसाइल हमलों और जवाबी तैयारियों के बीच आशंका जताई जा रही है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे मिडिल ईस्ट को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है। आशीष/ईएमएस 10 मई 2026