क्षेत्रीय
10-May-2026
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- आकाश दूत प्रसंग आयोजन - विश्व प्रवासीपक्षी दिवस भोपाल (ईएमएस)। जब कोई प्रवासी पक्षी अपने झुंड के साथ आसमान में उड़ान भरता है तो यह केवल एक आकाश की यात्रा ही नहीं होती—यह प्रकृति ऋतु परिवर्तन और सह-अस्तित्व के साथ साथ प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हुए सीमाओं को पार कर जाते हैं, मानो हमें यह सिखा रहे हों कि प्रकृति में न कोई सीमा है, न कोई बंधन। हमें तो समस्त पक्षियों से कुछ कुछ अच्छी आदतों को सीखने की जरूरत है। उपरोक्त उद्गार प्रो डा अर्पण भारद्वाज कुलगुरु सम्राट विक्रमादित्य विवि उज्जैन द्वारा विश्व प्रवासी पक्षी दिवस 9 मई को पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान द्वारा आयोजित विशेष प्रसंग परिसंवाद में शुभकामना संदेश में व्यक्त किए। इस अवसर पर चक्रबर्ती राज गोपालचारी प्रबंध संस्थान बरकतउल्लाह विवि भोपाल के आचार्य निदेशक अतिथि वक्ता प्रो.डा विवेक शर्मा, प्रो.डा. धर्मेंद्र मेहता निदेशक संकाय अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान एवं प्रो डा डी.डी. बेदिया निदेशक आईक्यूएसी द्वारा भीगर्मियों में पक्षियों के लिए पानी रखने के सबसे उत्तम साधन सकोरा को परिसर में स्थापित करते हुए अपने सारगर्भित विचार साझा किए संयोजक प्रो.डा. धर्मेंद्र मेहता निदेशक संकाय अध्यक्ष ने बताया कि हर पक्षी मायने रखता है - आपका अवलोकन मायने रखता है इस वर्ष की थीम इस बात पर केंद्रित है कि कैसे समुदाय-आधारित विज्ञान ही नागरिक विज्ञान प्रवासी पक्षियों के संरक्षण में मदद कर सकता है, जिसमें पक्षियों की गिनती और आवास की निगरानी तक शामिल है। संयुक्त राष्ट्र संपोषणीय विकास लक्ष्यों 13, 14 एवं 15 भी विशेष रूप से उल्लेख भी किया,जो अपनी विशिष्ट भूमिका निभाते हैं प्रो. डा.डी.डी.बेदिया निदेशक आईक्यूएसी ने कहा कि विश्व प्रवासी पक्षी दिवस महत्व पारिस्थितिकी तंत्रों की परस्पर संबद्धता और प्रवासी प्रजातियों पर मानवीय गतिविधियों के वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित है। अतिथि वक्ता प्रबंध गुरु प्रो डा विवेक शर्मा निदेशक क्रीम भोपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रत्येक वर्ष लाखों पक्षी विशाल दूरी की यात्रा करते हैं, अक्सर महाद्वीपों को पार करते हुए, आवास विनाश, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और अवैध शिकार जैसे कई खतरों का सामना करते हुए जीवन सामंजस्य कौशल में अपने अस्तित्व संघर्ष में सम्मिलित होते हैं।इस अवसर पर उपस्थित विद्यार्थियों शोधार्थियों ने भी प्रवासी पक्षियों और उनके आवासों के संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। इंजी.मेहा शर्मा, संस्थान शोधार्थी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि कीट, जैसे बीटल, कैटरपिलर और मक्खियाँ, प्रवास के दौरान पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रदान करते हैं। कई प्रवासी प्रजातियाँ, जैसे वारब्लर, स्वालो और फ्लाईकैचर शामिल हैं, अपनी लंबी यात्राओं के लिए कीटों पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं। कीटों की उपलब्धता न केवल प्रवास के समय को प्रभावित करती है, बल्कि पक्षी अपने प्रजनन और सर्दियों के मैदानों तक पहुँचने की प्रक्रिया मे सम्मिलित होते हैं। विद्यार्थियों ने सक्रिय उपस्थिति करते हुए पत्रिका प्रकाशन समूह द्वारा वार्षिक अभियान का भी उल्लेख किया जो अक्सर अप्रैल-मई के महीनों में सक्रिय रूप से परिंडे एवं सकोरे भी स्थापित किए जाते हैं। यह महत्वपूर्ण दिवस भी संवेदनशीलता का अभियान यह मूक जीव-जंतुओं के प्रति दया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। - ईएमएस / 10 मई 26