बिलासपुर (ईएमएस)। बिल्हा क्षेत्र के बटोरी गांव में खेलते समय आवारा स्वान के हमले का शिकार हुए दो मासूम बच्चों की चीखों ने पूरे गांव को दहला दिया। महज दो वर्षीय एक बालक और एक बालिका के चेहरे, आंखों और पलकों पर गंभीर चोटें आईं। परिजन घबराई हालत में दोनों बच्चों को तत्काल छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की तत्परता, घंटों की मेहनत और जटिल सर्जरी ने दोनों बच्चों की आंखों की रोशनी बचा ली। फिलहाल दोनों बच्चे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, बिल्हा क्षेत्र अंतर्गत बटोरी गांव में एक आवारा स्वान ने अचानक बच्चों पर हमला कर दिया। हमले में बच्चों के चेहरे और आंखों के आसपास कई गहरे घाव हो गए। घटना के बाद परिजन तत्काल बच्चों को सिम्स लेकर पहुंचे। सिम्स पहुंचते ही नेत्र रोग विभाग की टीम ने बच्चों का आपातकालीन उपचार शुरू किया। डॉक्टरों के मुताबिक मामला ‘कैटेगरी-3 डॉग बाइट’ का था, जिसमें रेबीज संक्रमण का खतरा अत्यधिक रहता है। डॉक्टरों ने सबसे पहले घावों की गहन सफाई की और तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन शुरू की। संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन भी लगाया गया। सबसे गंभीर चुनौती बच्चों की आंखों और पलकों पर लगी चोट थी। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसी दिन ‘अर्जेंट लिड रिपेयर सर्जरी’ करने का निर्णय लिया। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त पलकों और ऊतकों की बेहद सावधानीपूर्वक मरम्मत की गई, ताकि आंखों की संरचना और दृष्टि सुरक्षित रह सके। कई घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने दोनों बच्चों की आंखों की रोशनी बचाने में सफलता हासिल की। - इन डॉक्टरों की टीम ने किया सफल इलाज इस पूरी सर्जरी में नेत्र रोग विभाग की टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम में डॉ. प्रभा सोनवानी, डॉ. संजय चौधरी, डॉ. आरती, डॉ. अनिकेत तथा निश्चेतना विभाग से डॉ. यशा तिवारी और डॉ. द्रोपती सहित नर्सिंग स्टाफ शामिल रहा। डॉग बाइट के मामलों में समय पर इलाज ही जीवन बचाता है। ऐसी स्थिति में पीडि़त को झाड़-फूंक और घरेलू उपचार से बचते हुए तुरंत अस्पताल लाना चाहिए। डॉ. रमणेश मूर्ति, डीन, सिम्स - 10 मई 2026