जबलपुर (ईएमएस)। भारत एक ऐसा देश है जहाँ बेटियों को घर की लक्ष्मी कहा जाता है, लेकिन दूसरी ओर आज भी कई परिवार बेटियों के जन्म के साथ ही उनके विवाह और दहेज की चिंता में डूब जाते हैं। ऐसे समय में समाज को नई दिशा देने वाला एक प्रेरणादायी उदाहरण जबलपुर जिले की तहसील सिहोरा स्थित रुक्मणी पैलेस में देखने को मिला, जहाँ एक दिवसीय सत्संग समारोह के दौरान दहेज मुक्त एवं सादगीपूर्ण विवाह संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर वर सुदामा दास एवं वधु मोना (भारती) ने बिना किसी दिखावे, तामझाम, डीजे, बैंड-बाजे, हल्दी एवं अन्य फिजूल रस्मों के अत्यंत सादगी और आध्यात्मिक वातावरण में विवाह किया। विवाह समारोह ने उपस्थित लोगों के मन में गहरा प्रभाव छोड़ा और समाज को यह संदेश दिया कि विवाह कोई व्यापार नहीं, बल्कि पवित्र संस्कार है। विवाह के पश्चात वर-वधु ने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल महाराज से मिली है। संत जी अपने सत्संगों में बताते हैं कि जब रिश्ते ऊपर से तय होकर आते हैं और सादगीपूर्ण तरीके से विवाह संभव है, तो फिर दिखावे और कर्ज के बोझ में क्यों डूबा जाए। - 10 मई 2026/ 07.00