राष्ट्रीय
10-May-2026
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* पीएम मोदी की उपस्थिति में आयोजित प्रदर्शनी में दिखेगा प्राचीन से आधुनिक सोमनाथ तक का गौरवशाली सफर अहमदाबाद (ईएमएस)| सोमनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘अमृत पर्व’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है, जिसमें विनाश से विकास तक की सोमनाथ की ऐतिहासिक यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंदिर परिसर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के साथ इस विशेष प्रदर्शनी का भी अवलोकन करेंगे। प्रदर्शनी में पौराणिक काल से लेकर जीर्णोद्धार के बाद आधुनिक स्वरूप में विकसित हुए सोमनाथ मंदिर की गौरवगाथा को एलईडी स्क्रीन, टेलीविजन स्लाइड्स और दुर्लभ छायाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इसमें मंदिर के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को अत्यंत आकर्षक तरीके से दर्शाया गया है। प्रदर्शनी में बताया गया है कि सोमनाथ का प्रथम ज्योतिर्लिंग अत्यंत प्राचीन है और इसका उल्लेख पवित्र ग्रंथ शिव महापुराण में भी मिलता है। सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग से लेकर वर्तमान काल तक इस मंदिर के पुनर्निर्माण और संरक्षण की परंपरा निरंतर चलती रही है। विदेशी आक्रमणों के कठिन दौर में वीर हमीरजी, कान्हादेव, राजा भोज और भीमदेव सोलंकी जैसे शूरवीरों ने सोमनाथ मंदिर की रक्षा और उसके पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रदर्शनी में इन ऐतिहासिक योगदानों को भी विस्तार से दर्शाया गया है। सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प और उनके प्रयासों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा दुर्लभ फोटोग्राफ भी प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण बने हुए हैं। इसके माध्यम से स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनर्स्थापन की ऐतिहासिक यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सोमनाथ तट से विश्व को दिए गए संदेश को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। इस संदेश में उन्होंने कहा था कि, “विकसित भारत के निर्माण के मूल में हमारी आध्यात्मिक शक्ति ही सर्वशक्तिमान आधार है।” आध्यात्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव को समर्पित यह विशेष प्रदर्शनी आगामी दिनों में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी खुली रहेगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले भाविक सोमनाथ की समृद्ध परंपरा और प्रेरणादायी इतिहास से परिचित हो सकेंगे। सतीश/10 मई