क्षेत्रीय
10-May-2026


सुपर सीडर और हैप्पी सीडर से बिना आग के होगी बुवाई बालाघाट (ईएमएस). जिले के किसानों से कृषि विभाग ने पराली और खेत की मेड़ों में आग न लगाने की अपील की है। विभाग ने चेताया है कि पराली जलाने से जहां जमीन की उर्वरता घटती है, वहीं यह किसानों के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए भी नुकसानदायक है। इसके स्थान पर आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाने पर जोर दिया गया है। खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे जिले के अन्नदाताओं को कृषि विभाग ने जागरूक करते हुए पराली न जलाने की सलाह दी है। खेतों को साफ करने के नाम पर लगाई जाने वाली आग न केवल फसल अवशेषों को नष्ट करती है, बल्कि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को भी कमजोर कर देती है। उपसंचालक कृषि फूलसिंह मालवीय ने बताया कि खेत में आग लगाने से मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है, जिससे केंचुए और लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता खत्म हो जाती है और किसानों को अधिक मात्रा में रासायनिक खाद और उर्वरकों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ती है। उन्होंने यह भी बताया कि मेड़ों को जलाने से मिट्टी का कटाव बढ़ता है और इससे निकलने वाला जहरीला धुआं परिवार के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। पराली जलाना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके लिए दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। कृषि विभाग ने किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह देते हुए बताया कि हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसे यंत्रों के माध्यम से बिना पराली जलाए ही फसल की बुवाई की जा सकती है। ये मशीनें फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर जैविक खाद में बदल देती हैं, जिससे खेत की नमी बनी रहती है, खरपतवार कम होते हैं और उत्पादन क्षमता बढ़ती है। विभाग ने यह भी जानकारी दी कि इन आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर शासन द्वारा अनुदान (सब्सिडी) उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी कृषि कार्यालय से संपर्क कर इस योजना का लाभ उठाएं और पर्यावरण संरक्षण के साथ अपनी खेती को भी अधिक लाभकारी बनाएं। भानेश साकुरे / 10 मई 2026