क्षेत्रीय
10-May-2026


श्रद्धालुओं ने प्रभुभक्ति, गुरुभक्ति और साधर्मी भक्ति कर बांटी बधाइयाँ जोधपुर (ईएमएस)। महान चिंतक राष्ट्र-संत पूज्य श्री चंद्रप्रभ जी महाराज का 64 वां जन्मदिवस देश भर से पधारे गुरुभक्तों के बीच रविवार को कायलाना रोड़ स्थित संबोधि धाम में धूमधाम से आयोजित किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं और साधक भाई बहनों ने प्रभुभक्ति, गुरुभक्ति और साधर्मी भक्ति कर एक-दूसरे को जन्मोत्सव की बधाइयाँ बांटी। इस अवसर पर महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागर जी महाराज ने कहा कि श्री चन्द्रप्रभ जी जैसा भाई मिलना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। आज हम दोनों भाइयों को संन्यास लिए हुए 45 साल से ऊपर हो गए हैं और हमारा प्यार आज भी राम-लक्ष्मण की तरह जीवंत है। सच तो यह है कि हमारे शरीर भले ही दो है, पर भीतर में प्राण एक ही है। श्री चन्द्रप्रभ जी सबसे हटकर-संत श्री ललितप्रभ जी ने कहा कि हमें या तो 100 किताबें लिखकर जानी चाहिए ताकि हमारे जाने के बाद भी दुनिया किताबों को पढ़कर हमें याद कर सके या फिर ऐसा जीवन जीकर जाना चाहिए कि हम पर 100 किताबें लिखी जा सके। मुझे गर्व है कि श्री चन्द्रप्रभ जी न केवल 300 से उपर किताबें लिखी हैं, वरन् ऐसा जीवन भी जिया है कि उन पर कई किताबें लिखी जा सकती है। उनकी प्रेरणा से अब तक हजारों लोग शाकाहार और व्यसनमुक्त जीवन का मार्ग अपना चुके हैं। उन्होंने एक ओर काफी वर्षों तक हम्फी, माउट आबू, हिमालय की गुफाओं में ध्यान कर, सूर्यास्त से सूर्योदय तक मौनव्रत धारणकर साधना का जीवन जिया वहीं दूसरी ओर साहित्य लेखन, प्रेक्टिकल प्रवचन देकर, मानवीय कल्याण परक कार्य करते हुए सेवाभरा जीवन जी रहे हैं जिस पर धर्म, समाज और राष्ट्र सदा-सदा गौरव करता रहेगा। जब उन्होंने श्री चन्द्रप्रभ जी को गले लगाया तो सभी श्रद्धालुओं के आंसू छलक आए। इस अवसर पर डाॅ. मुनि शांतिप्रिय सागर जी ने कहा कि श्री चन्द्रप्रभ जी गुरुदेव के व्यक्तित्व और कृतित्व में महावीर की साधना, बुद्ध की दृष्टि, कबीर की क्रांति, मीरा की भक्ति और आइंस्टीन की सच्चाई है। आपकी पहचान जैन संत से ज्यादा जन संत के रूप में होती है। आपने देशभर में सर्वधर्म सद्भाव का माहौल खड़ाकर और जातिवाद, पंथवाद के दुराग्रह को कम कर जो मिशाल पेश की है उसे आने वाला कम सदा सलाम करता रहेगा। मेरा सौभाग्य है कि मुझे गुरु चरणों में समर्पित होकर मानव सेवा और आध्यात्मिक विकास करने का अवसर मिला। इस अवसर पर श्री चन्द्रप्रभ जी महाराज ने कहा कि आज मैं जो कुछ हूँ वह सब ईश्वर, गुरु और माता-पिता की कृपा का फल है। मेरा सौभाग्य है कि माता-पिता ने बुढ़ापे में संन्यास जीवन लिया और वसीयत के रूप में हमें भी संन्यास का पावन मार्ग प्रदान किया। उन्होंने कहा कि मेरा हर पल मानवता के काम आए यही प्रभु से प्रार्थना है। उन्होंने कहा कि जैसे हम जन्मदिन को बहुत ही आनंद उल्लास और सेवा के रूप में मनाते हैं वैसे ही हमें हर दिन को आनंद उल्लास के साथ जीना चाहिए और प्रतिदिन शुभ कर्म करके जीवन को धन्य करना चाहिए। सांसों का कोई भरोसा नहीं है इसलिए हर पल को उत्सव बनकर जियो। जीवन में अपनाएं तीन मंत्र - उन्होंने कहा कि सुखी जीवन जीने के तीन मंत्र है - सहजता से जियो, सकारात्मकता के साथ जियो और सरलता से जियो। जीवन में सफलता के साथ विफलता और सम्मान के साथ अपमान का भी स्वागत करो। क्रोध करने की जगह गुस्से को पीना सीखो। जिसके पास शक्ति होती है वह सिकंदर बनता है पर जिसके पास सहनशक्ति होती है वह तीर्थंकर बनता है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में कभी भी किसी की आलोचना मत करो हो सके तो रोज अनुमोदना करो। स्वार्थी नहीं सारथी बनो। भगवान ने जो दिया है उसे भरपूर मानते हुए संतुष्ट जीवन जियो और सदा दूसरों के काम आओ। उन्होंने कहा कि मैंने बस लोगों की जिंदगी को चार्ज करने का काम किया है। हम जिंदगी के हर पल को आनंद के साथ जिए और हर कार्य अतिउत्तम तरीके से सम्पादित करें, ये दो बातें हमारी जिंदगी को सोने का सिक्का बना देगी। कार्यक्रम में ओसवाल समाज के प्रमुख के एन भंडारी, अध्यक्ष अशोक पारख, महामंत्री देवेंद्र गैलड़ा, गौतम सालेचा, दिनेश साबू, संदीप मेहता, पवन मेहता, लता भंडारी इंदौर, योगिता यादव, डॉ अनिल राठी, अशोक दफ्तरी जयपुर आदि अनेक वक्ताओं ने गुरुदेव के जीवन पर विचार रखे। इस अवसर पर अशोक देरासरिया बेंगलुरु सहित संबोधि धाम ट्रस्ट मंडल द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का श्री गणेश किया गया। कार्यक्रम में सेवा देने वाले सोहनलाल मेड़तिया अमित धारीवाल रोशन मेहता सतीश मुणोत शिल्पा खजांची ललित चोपड़ा निशा मेहता को साहित्य देकर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर जब जयपुर की मधुर गायिका डॉ सीमा दफ्तरी ने गुरु भक्ति पर भजन गुनगुनाए तो सभी श्रद्धालु खड़े होकर झूमने लगे। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने 64 दीप जलाकर गुरुशक्ति की आरती भी की। जीव दया के रूप में जे एल राठी परिवार द्वारा चारे की गाड़ी गौ सेवा में समर्पित की गई। चन्द्रबली सिंह / ईएमएस / 10/05/2026