होर्मुज़ जलडमरूमध्य में घोस्ट शिपिंग का सहारा नई दिल्ली,(ईएमएस)। मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते युद्ध के खतरों और ईरानी हमलों की आशंका ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को वॉर ज़ोन में तब्दील कर दिया है। तेल निर्यात को सुरक्षित रखने के लिए अब शिपिंग कंपनियां अपनी पहचान छिपाने की अनोखी रणनीति अपना रही हैं। ताज़ा समुद्री डेटा के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में कच्चे तेल से लदे दो विशाल टैंकरों (वीएलसीसी) ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने ट्रांसपोंडर (ट्रैकर) बंद कर दिए और अत्यंत गोपनीयता के साथ होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार किया। समुद्री सुरक्षा की भाषा में इस प्रक्रिया को डार्क सेल या घोस्ट शिपिंग कहा जा रहा है। शिपिंग एनालिटिक्स फर्म के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को इस उभरते हुए खतरनाक चलन की पुष्टि हुई। पनामा का झंडा लगे एक विशाल तेल वाहक जहाज बसरा एनर्जी ने 1 मई को अबू धाबी के टर्मिनल से करीब 2 मिलियन बैरल कच्चा तेल लादा था। अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस टैंकर ने संवेदनशील समुद्री क्षेत्र को पार करते समय अपना ट्रैकर बंद कर दिया और 6 मई को सफलतापूर्वक खाड़ी से बाहर निकल गया। इसी तरह, कियारा एम नामक एक अन्य विशाल टैंकर ने भी रविवार को अपना ट्रांसपोंडर बंद करके खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकलने में कामयाबी हासिल की। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी और उसके वैश्विक खरीदार फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में फंसे तेल को बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इन जहाजों के ट्रैकर बंद करने का मुख्य उद्देश्य संभावित मिसाइल या ड्रोन हमलों से बचना है, क्योंकि ट्रैकर चालू रहने पर जहाजों की सटीक लोकेशन दुश्मनों को आसानी से मिल जाती है। वैश्विक तेल बाजार पर इस तनाव का सीधा असर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें वर्तमान में 126 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। यदि टैंकरों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता इसी तरह बनी रहती है, तो जहाजों के बीमा प्रीमियम और शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी होना तय है। इसका सीधा परिणाम दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लगने के रूप में सामने आ सकता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में घोस्ट शिपिंग का बढ़ता चलन यह साफ कर रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए शिपिंग कंपनियां अब किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 12 मई 2026