क्षेत्रीय
12-May-2026
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- नई जगह पर बसेंगे 3 ग्राम - 400 एकड़ भूमि का होगा अधिग्रहण कोरबा (ईएमएस) तीन ग्रामो के ग्रामीणों की 400 एकड़ से अधिक जमीन खदान में समाएगी। उनके लिए चिन्हित बसाहट स्थल पर सड़क बनाने व अन्य जरूरी तैयारी में एसईसीएल-कुसमुंडा प्रबंधन जुटा हुआ है। ये तीन ग्राम खोडरी, पाली व जटराज हैं, जो एसईसीएल कुसमुंडा खदान के विस्तार से प्रभावित ग्राम में शुमार है। इन ग्रामो के आसपास बसे ग्रामो की जमीन की अधिग्रहण भी प्रक्रिया में है। लेकिन इनकी बसाहट चिन्हित नहीं करने से विस्थापन में अभी समय लगेगा। लेकिन भविष्य में खदान के निकट संचालन से परेशानी और अधिक बढ़ सकती है। अगला मौसम मानसून का है, ऐसे में बारिश के बाद ही चिन्हित बसाहट स्थल पर एसईसीएल कुसमुंडा खदान विस्तार से प्रभावित खोडरी, पाली व जटराज का विस्थापन हो सकता है। हालांकि बसाहट स्थल पर सड़क बनाने के साथ ही अन्य जरूरी तैयारी में जुटा हुआ है। जटराज के खदान प्रभावितों ग्रामीणों को सर्वमंगला मंदिर के आगे नहर मार्ग किनारे बसाने की तैयारी है। चिन्हित बसाहट स्थल पर डंपिंग यार्ड की मिट्टी को काटने के बाद समतलीकरण कराया गया है। चूंकि डंपिंग यार्ड की मिट्टी को काटकर बसाहट स्थल के रूप में चिन्हित किए जाने पर प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षा की चिंता सता रही है। ऐसे में डंपिंग यार्ड के हिस्से की मिट्टी की भूस्खलन की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा के लिहाज से मोटी दीवार का निर्माण कराने मांग की है। बारिश होने पर मिट्टी का कटाव भी हो चुका है। इधर, ग्राम खोडरी व पाली के प्रभावितों को वैशाली नगर के निकट कुसमुंडा फोरलेन किनारे बसाने खाली जमीन का समतलीकरण कार्य के बाद सड़क व पानी टंकी का निर्माण करा लिया है। अन्य जरूरी कार्य पूर्ण कराए जा रहे हैं। - 12 साल से अटकाई जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया एसईसीएल प्रबंधन ने कुसमुंडा खदान विस्तार से प्रभावित गेवरा बस्ती की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने के बाद 12 साल से अटकाई हुई है। बस्तीवासियों के अनुसार 13 मई 2014 को जमीन की खरीदी-बिक्री पर स्टे लगाया। इसके बाद 18 जुलाई 2018 को अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन अभी तक मुआवजा व रोजगार पाने की उम्मीदें साकार नहीं हो पाई है। दूसरी ओर ग्राम खोडरी की अधिग्रहित जमीन पर खनन कार्य शुरू कर दिया है। इससे गेवरा बस्ती के प्रभावितों की समस्या बढ़ गई है। - एसईसीएल कुसमुंडा को 75 मिलियन टन मंजूरी मिली विश्व की सबसे बड़ी कोल माइंस बनाने एसईसीएल प्रबंधन ने 75 मिलियन टन सालाना कोयला खनन की मंजूरी कोल इंडिया की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से हासिल कर ली है। इसके बाद से अब प्रबंधन अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को पूर्ण करने में जुटा है। हालांकि मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 में एसईसीएल कुसमुंडा को 39 मिलियन टन सालाना खनन का लक्ष्य मिला है। पूर्व में सालाना 50 मिलियन टन खनन कर चुकी एसईसीएल कुसमुंडा खदान को मौजूदा वित्तीय वर्ष का लक्ष्य को तीन ग्रामो के विस्तार से हासिल करने में सफल होगी। - 12 मई