राष्ट्रीय
12-May-2026
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चेन्नई,(ईएमएस)। तमिलनाडु की सियासत में मंगलवार को एक ऐसा मोड़ आया जिसने राज्य के पूरे राजनीतिक समीकरण को बदलकर रख दिया है। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्त्री कझगम (टीवीके) के लिए यह दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया। विधानसभा में बहुमत के आंकड़े के लिए संघर्ष कर रही टीवीके को अब एआईएडीएमके में हुई बड़ी टूट का सीधा फायदा मिला है। पूर्व मंत्री सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके के एक बड़े गुट ने आधिकारिक तौर पर थलापति विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है, जिससे फ्लोर टेस्ट से पहले विजय की सरकार बेहद मजबूत स्थिति में आ गई है। तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके अब स्पष्ट रूप से दो धड़ों में बंट गई है। आंकड़ों की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी (ईपीएस) के पास अब केवल 22 विधायकों का समर्थन बचा है, जबकि सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट के पास 24 विधायकों का साथ है। इस विद्रोही गुट ने थलापति विजय के पाले में जाने का फैसला कर राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। सीवी शनमुगम ने मंगलवार सुबह इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का जन्म ही डीएमके के विरोध में हुआ था और पिछले 53 वर्षों से उनकी राजनीति इसी विचारधारा पर टिकी है। शनमुगम ने खुलासा किया कि पार्टी के भीतर एक प्रस्ताव आया था कि डीएमके के सहयोग से सरकार बनाई जाए, जिसे उनके गुट ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि वे डीएमके के साथ गठबंधन करते, तो एआईएडीएमके का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता। अपने स्वाभिमान और विचारधारा को बचाने के लिए उन्होंने थलापति विजय की टीवीके को समर्थन देना बेहतर समझा। इस गुट ने एसपी वेलुमणि को अपना फ्लोर लीडर भी चुन लिया है।थलापति विजय के लिए यह समर्थन किसी संजीवनी से कम नहीं है। चुनाव परिणामों के बाद जहां वे बहुमत के लिए एक-एक विधायक के समर्थन की उम्मीद कर रहे थे, वहीं अब विधायकों का एक पूरा कुनबा उनके साथ खड़ा है। इस घटनाक्रम ने न केवल सत्ताधारी डीएमके को झटका दिया है, बल्कि तमिलनाडु की द्विदलीय राजनीति में एक तीसरे मजबूत विकल्प के उदय पर मुहर लगा दी है। अब सबकी निगाहें विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट पर टिकी हैं, जहां विजय की शक्ति का वास्तविक परीक्षण होगा। यह राजनीतिक घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि तमिलनाडु की जनता और नेता अब पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से इतर नए नेतृत्व की ओर देख रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/12मई 2026