राज्य
12-May-2026


- श्मशान घाट तक निभाई पुत्र की जिम्मेदारी - बेटियों के इस साहसी कदम ने पूरे इलाके में सराहना वैशाली (ईएमएस)। बिहार के वैशाली जिले में सदियों पुरानी सामाजिक परंपराओं को दरकिनार कर पांच बेटियों ने अपने पिता की अंतिम यात्रा में वह भूमिका निभाई, जो आमतौर पर बेटों के लिए आरक्षित मानी जाती है। वैशाली थाना क्षेत्र के नया टोला गांव में तारिणी प्रसाद सिंह के निधन के बाद समाज के सामने यह सवाल था कि उन्हें कंधा कौन देगा, क्योंकि उनका कोई पुत्र नहीं था। इस घड़ी में उनकी पांचों बेटियों—पूनम, नीलम, माधुरी, माला और चांदनी—ने आगे बढ़कर रूढ़ियों को तोड़ा और न केवल पिता की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार भी किया। बेटियों के इस साहसी कदम ने पूरे इलाके में एक मिसाल कायम की है। अंतिम यात्रा के दौरान श्मशान घाट तक का यह दृश्य देखकर गांव का हर व्यक्ति भावुक हो उठा। बेटियों का कहना है कि समाज में अक्सर लड़कों को अधिक महत्व दिया जाता है और लड़कियों को कमजोर समझा जाता है, लेकिन वे इस धारणा को बदलना चाहती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि एक महिला भगवान राम को जन्म दे सकती है, तो वह पिता की अर्थी को कंधा क्यों नहीं दे सकती? स्वर्गीय तारिणी प्रसाद सिंह ने अपनी पांचों बेटियों को उच्च शिक्षित बनाया और उनकी शादी कर अपने पिता होने का कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभाया था। बेटियों ने भावुक होते हुए कहा कि जिस पिता ने उन्हें जीवन भर सहारा दिया, उनके अंतिम समय में पुत्रधर्म निभाना उनका फर्ज है। इस घटना ने न केवल पितृसत्तात्मक सोच पर प्रहार किया है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया है कि बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं हैं। प्रशासन और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने भी बेटियों के इस निर्णय की सराहना की है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। रामयश/ईएमएस 12 मई 2026