राज्य
12-May-2026


बोलीं सुपरवाइजरी नेगलिजेंस आई सामने, नर्सिंग स्टूडेंट्स को कैनुला लगाना भी नहीं आता जयपुर (ईएमएस)। कोटा मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले ने चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने जेके लोन और एमबीएस अस्पतालों का निरीक्षण किया और माना कि सुपरवाइजरी नेगलिजेंस सामने आ रही है. उन्होंने कहा कि ओटी और पोस्ट ऑपरेटिव प्रोटोकॉल में चूक हुई है. साथ ही नर्सिंग स्टूडेंट्स के प्रशिक्षण पर भी सवाल उठाए और बोलीं कि नर्सिंग स्टूडेंट्स को कैनुला लगाना तक नहीं आता. वहीं अस्पताल के बाहर पीड़ित परिजन 24 घंटे से धरने पर हैं. वे 50 लाख मुआवजे और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे है. अस्पताल में फिलहाल 5 प्रसूताएं भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की हालत में सुधार, कुछ अब भी आईसीयू में। शासन सचिव राठौड़ ने जेके लोन एवं एमबीएस अस्पतालों का बारीकी से निरीक्षण किया उन्होंने लेबर रूम, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड, आईसीयू और वेटिंग एरिया के साथ-साथ अस्पताल में तैनात डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों एवं मरीजों के अटेंडेंट से भी फीडबैक लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रसूताओं की एक के बाद एक बिगड़ती हालत ओटी और पोस्ट ऑपरेटिव केयर प्रोटोकॉल में हुई चूक की ओर इशारा करती है। उन्होंने स्पष्ट कहा, स्ट्रांग सुपरविजन की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं दिखता एमबीएस अस्पताल के दौरे के दौरान नर्सिंग के विद्यार्थियों से रूबरू होने पर गायत्री राठौड़ ने कहा कि इन प्रशिक्षुओं को अब तक बुनियादी चीजें भी नहीं आती. उन्होंने कहा, इन विद्यार्थियों को कैनुला लगाना तक नहीं आ रहा है उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था को पुख्ता किया जाए.प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि यह मामला दवाओं के किसी रिएक्शन या किसी संक्रमण के कारण हो सकता है. फिलहाल एहतियातन प्रभावित दवाओं को बंद कर जांच के लिए भेज दिया गया है. जयपुर से आई विशेषज्ञ टीम भी मरीजों के रिकॉर्ड, आईसीयू और वार्ड के सैंपल जांच कर रिपोर्ट तैयार कर रही है। अशोक शर्मा/ 4 बजे/ 12 मई 2026