अंतर्राष्ट्रीय
12-May-2026


तेहरान,(ईएमएस)। मध्य पूर्व के आसमान में फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। 11 मई की सुबह, अमेरिकी वायुसेना के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक,एफ-35 लाइटनिंग 2 को संयुक्त अरब अमीरात में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। इस घटना ने न केवल क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही जारी कूटनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। यह अत्याधुनिक स्टील फाइटर जेट होरमुज जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक उड़ान भर रहा था, जब अचानक जेट ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन ट्रांसपोंडर कोड 7700 प्रसारित करना शुरू किया। एविएशन सेक्टर में यह कोड तब इस्तेमाल होता है जब पायलट किसी गंभीर खतरे या तकनीकी खराबी का सामना कर रहा होता है। विमान ओमान की खाड़ी के ऊपर था जब जेट ने अचानक अपना रास्ता बदला और यूएई की ओर रुख किया। रहस्यमय बात यह रही कि जैसे ही विमान यूएई के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, पायलट ने अपना ट्रांसपोंडर बंद कर दिया और रडार से बचकर सीधे अल-धाफरा एयरबेस पर आपातकालीन लैंडिंग की। रक्षा विशेषज्ञों के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि पिछले 24 घंटों के भीतर इसी इकाई के एक और एफ-35 विमान ने कोड 7700 प्रसारित किया था। एक पांचवीं पीढ़ी के विमान का बार-बार इस तरह के संकट में आना या गंभीर यांत्रिक विफलता की ओर इशारा करता है या किसी बाहरी हस्तक्षेप की संभावना को जन्म देता है। इस घटना के बाद से ही ईरान के सरकारी मीडिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स पर दावों की बाढ़ आ गई है। ईरानी सूत्रों का कहना है कि उनके रक्षा तंत्र ने अमेरिकी विमानों को अपनी सीमा के पास ट्रैक कर निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप विमान को नुकसान पहुंचा और अपनी उड़ान बीच में छोड़कर भागना पड़ा। हालांकि, स्वतंत्र सैन्य विश्लेषक इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एफ-35 किसी मिसाइल या एंटी-एयरक्राफ्ट गन से हिट हुआ होता, तब उसका सैकड़ों मील दूर स्थित अल-धाफरा तक सुरक्षित पहुंच पाना असंभव था। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, पेंटागन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जिससे अटकलों का बाजार गर्म है। क्या यह वास्तव में इंजन की कोई तकनीकी खराबी थी, या ईरान ने आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का उपयोग करके विमान के नेविगेशन सिस्टम को जाम किया था? होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों में से एक है, और यहां अमेरिकी विमानों की लगातार मौजूदगी ईरान को हमेशा अखरती रही है। हाल के हफ्तों में ईरान द्वारा यूएई पर किए गए हमलों और उसके बाद के तनाव ने इस क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। फिलहाल, अल-धाफरा बेस पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और विमान की जांच की जा रही है। अगर यह साबित होता है कि विमान किसी हमले का शिकार हुआ था, तब यह क्षेत्र में एक बड़े सैन्य टकराव की शुरुआत हो सकती है। और अगर यह केवल तकनीकी खराबी है, तब अरबों डॉलर के एफ-35 कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा हो सकता है। आशीष दुबे / 12 मई 2026