अंतर्राष्ट्रीय
12-May-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव फिर खतरनाक मोड़ पर आ गया है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बेहद सख्त दिख रहे हैं और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों पर तीखा हमला किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने बीते 47 सालों से अमेरिका और दुनिया को गुमराह किया है, अमेरिका को सबसे बड़ा मूर्ख समझा है, लेकिन अब वह ऐसा नहीं कर पाएगा। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते से जुड़ी ओबामा प्रशासन की नीतियों की कड़ी आलोचना कर कहा कि ओबामा ने प्रतिबंधों में ढील और नकद भुगतान के ज़रिए ईरान को आर्थिक रूप से मज़बूत किया। ट्रंप के अनुसार, ओबामा ईरान के प्रति नरम थे, उन्होंने इजराइल और अन्य सहयोगियों को दरकिनार किया, और ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर दिए, जिसमें सूटकेस व बैग में भेजे गए 1.7 अरब डॉलर नकद भी शामिल थे। ट्रंप ने कटाक्ष किया कि ईरान ने सोचा था कि उस सबसे कमज़ोर और बेवकूफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति मिल गया है। ट्रंप ने पुष्टि की कि अमेरिका ने ईरान को शांति प्रस्ताव भेजा था, लेकिन उन्होंने पूरी तरह अस्वीकार्य और गलत जवाब बताकर तुरंत खारिज किया। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के जवाब का विवरण नहीं दिया। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान ने युद्ध के नुकसान का मुआवज़ा, आर्थिक प्रतिबंध हटाने और हॉर्मोज़ जलडमरूमध्य पर अपने अधिकार की बात थी। प्रस्ताव में कहा गया था कि लड़ाई केवल ईरान तक सीमित न रहे बल्कि पूरे क्षेत्र में समाप्त हो। इस बीच, खाड़ी देशों में ड्रोन गतिविधि बढ़ गई है और तनाव गहरा रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के कुछ हिस्से को पतला करने या किसी तीसरे देश को सौंपने पर विचार कर रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है और समृद्ध यूरेनियम हटाना अनिवार्य है। उन्होंने कड़े कदम उठाने की संभावना से इंकार नहीं किया। वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजस्कियान ने स्पष्ट किया कि ईरान दुश्मन के सामने कभी सिर नहीं झुकाएगा और बातचीत आत्मसमर्पण नहीं है। आशीष दुबे / 12 मई 2026