राष्ट्रीय
13-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। कुकिंग केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि दिमाग को तेज और सक्रिय रखने का भी प्रभावी तरीका है। यह दावा किया है शोध कर्ता वैज्ञानिकों ने। उनके अनुसार खाना बनाना एक तरह की “कॉग्निटिव एक्सरसाइज” की तरह काम करता है, जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और भूलने की बीमारी के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। जो लोग नियमित रूप से खाना बनाते हैं, उनमें डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा काफी कम होता है। जापान के टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के शोधकर्ताओं ने 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के करीब 11 हजार लोगों की जीवनशैली का छह वर्षों तक अध्ययन किया। यह रिसर्च बीएमजे जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ में प्रकाशित हुई है। अध्ययन के नतीजों में सामने आया कि जो लोग सप्ताह में कम से कम एक बार भी मन लगाकर खाना बनाते हैं, उनकी मानसिक क्षमता ज्यादा सक्रिय रहती है और उनमें भूलने की बीमारी का जोखिम कम पाया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार खाना बनाना केवल एक सामान्य घरेलू काम नहीं है, बल्कि यह कई मानसिक प्रक्रियाओं को एक साथ सक्रिय करता है। जब कोई व्यक्ति किचन में खाना तैयार करता है, तो उसे एक साथ कई काम करने होते हैं, जैसे सब्जियां काटना, मसालों का संतुलन तय करना, गैस की आंच पर ध्यान रखना और समय का प्रबंधन करना। इस पूरी प्रक्रिया से दिमाग की प्लानिंग और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। रिसर्च में यह भी बताया गया कि खाना बनाते समय हमारी सभी इंद्रियां सक्रिय होती हैं। मसालों की खुशबू, तड़के की आवाज, सब्जियों के रंग और स्वाद का अनुभव दिमाग के न्यूरॉन्स को सक्रिय बनाए रखता है। इसके अलावा किसी रेसिपी को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने के लिए एकाग्रता की जरूरत होती है, जो ध्यान या मेडिटेशन की तरह मानसिक शांति और फोकस बढ़ाने में मदद करती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति रोज खाना नहीं बना सकता, तब भी सप्ताह में एक दिन अपनी पसंद का भोजन खुद तैयार करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे तनाव कम होता है और शरीर में डोपामाइन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन’ का स्तर बढ़ता है, जिससे मूड बेहतर होता है। विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र में याददाश्त कमजोर होना सामान्य माना जाता है, लेकिन कुकिंग के दौरान नई रेसिपी याद रखना, सामग्री का सही अनुपात तय करना और अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखना दिमाग के उस हिस्से को सक्रिय करता है, जो याददाश्त के लिए जिम्मेदार होता है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संबंध मजबूत होते हैं और लंबे समय तक मानसिक क्षमता बेहतर बनी रहती है। सुदामा/ईएमएस 13 मई 2026