नई दिल्ली,(ईएमएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत और पाकिस्तान के बीच जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए नागरिक समाज की भूमिका और आपसी संवाद पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम लोगों के बीच आपसी संपर्क है और बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले रहने चाहिए। होसबाले ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का विश्वास पूरी तरह खो दिया है। ऐसी स्थिति में अब समय आ गया है कि दोनों देशों का नागरिक समाज, शिक्षाविद, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और सामुदायिक नेता आगे आएं और नेतृत्व करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अंततः नागरिक समाज के रिश्ते ही काम आएंगे क्योंकि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं और हम कभी एक ही राष्ट्र रहे हैं। आतंकवाद के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने 26/11, पुलवामा और पहलगाम जैसे हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान की ओर से उकसावे वाली हरकतें जारी रहती हैं। इसके बावजूद, उन्होंने सुझाव दिया कि व्यापार, वाणिज्य और वीजा जारी करने जैसी प्रक्रियाएं बंद नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखने का उद्देश्य यही है कि संवाद के लिए हमेशा एक खिड़की खुली रहे। उन्होंने सरकार को सलाह देते हुए कहा कि किसी भी देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा करना सर्वोपरि है और मौजूदा सरकार को इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए। लेकिन सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ ट्रैक टू कूटनीति और जन-संपर्क को और अधिक आजमाया जाना चाहिए। उन्होंने माना कि राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में भारत के प्रति नकारात्मकता हो सकती है, लेकिन सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर जुड़ाव ही भविष्य की उम्मीद है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक राजनयिक माध्यमों पर काफी समय से चुप्पी छाई हुई है और नागरिक समाज की भागीदारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वीरेंद्र/ईएमएस/13मई 2026