अंतर्राष्ट्रीय
13-May-2026
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ट्रंप कनाडा और ग्रीनलैंड पर पहले नजर रखे हुए हैं वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बार फिर उस समय हड़कंप मच गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को संयुक्त राज्य अमेरिका का 51वां राज्य बनाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने का संकेत दिया। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान इस बात की पुष्टि की है कि वे वेनेजुएला के भविष्य को लेकर इस बड़े कदम पर मंथन कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी ट्रंप कनाडा और ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों को अमेरिकी संघ में शामिल करने के अपने विचार सार्वजनिक कर चुके हैं, लेकिन वेनेजुएला के संदर्भ में यह बयान मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस विचार के पीछे वेनेजुएला के विशाल प्राकृतिक संसाधनों को मुख्य वजह बताया है। ट्रंप के अनुसार, वेनेजुएला के पास लगभग 40 ट्रिलियन डॉलर का तेल भंडार है, जो अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वहां की जनता उन्हें पसंद करती है और अमेरिका के साथ जुड़ना उनके हित में होगा। यह घटनाक्रम 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी प्रशासन द्वारा वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पद से हटाए जाने के बाद आया है। उस समय ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि अमेरिका अस्थायी रूप से वेनेजुएला का प्रबंधन संभालेगा ताकि एक सुरक्षित और उचित ट्रांजिशन (सत्ता हस्तांतरण) सुनिश्चित किया जा सके। फिलहाल, ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला के तेल उद्योग को पुनर्जीवित करने और वहां विदेशी निवेश लाने पर जोर दे रहा है। हालांकि ट्रंप ने स्वयं को आधिकारिक रूप से वहां का प्रशासक घोषित नहीं किया है, लेकिन उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पेटे हेगसेथ जैसे शीर्ष अधिकारियों की एक टीम तैनात की है। अमेरिकी प्रशासन वर्तमान में डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ समन्वय कर रहा है, जिन्हें तेल क्षेत्र के प्रबंधन का व्यापक अनुभव है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वेनेजुएला के पुनर्निर्माण की अंतिम जिम्मेदारी उन पर है। यदि वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है, तो यह आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी भौगोलिक और राजनीतिक घटना होगी। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े विरोध और कानूनी चुनौतियों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस 13 मई 2026