राष्ट्रीय
13-May-2026
...


पंजाब में आप के अंदर चल रही खींचतान बनेगी मददगार नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बना चुकी बीजेपी पंजाब में यही करिश्मा करने की तैयारी में जुट गई है। अगले साल फरवरी-मार्च में पंजाब सहित उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब को छोड़कर बाकी चारों राज्यों में बीजेपी सत्तासीन है। पंजाब में पार्टी पहले क्षेत्रीय दल शिरोमणि अकाली दल के साथ मिलकर सरकार बना चुकी है, लेकिन अपने बलबूते वह कभी सत्ता में नहीं आई। पंजाब में ऐतिहासिक बहुमत के साथ 2022 में आप सत्ता में आई थी। लेकिन अभी उसके राजनीतिक वजूद पर सवालिया निशान उठ रहे है। सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने, ईडी की कार्रवाई के अलावा पार्टी में गुटबाजी उसके लिए सबसे बड़ा संकट बन सकती है। इसके बाद आप के लिए पंजाब में विधायकों को एकजुट रखना मुश्किल हो सकता है। दिल्ली में वह पहले ही सत्ता गंवा चुकी है। इन हालात में पंजाब की अहमियत उसके लिए बहुत ज्यादा है। पंजाब में पिछले विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव व उपचुनाव में बीजेपी को कामयाबी नहीं मिली। इधर पार्टी ने राज्य में जमीन मजबूत करने की कोशिशें तेज की हैं। मगर सवाल है कि पंजाब के लिए बीजेपी की रणनीति क्या होगी? क्या बीजेपी को पश्चिम बंगाल की तरह पंजाब के लिए अलग रणनीति बनानी होगी? सवाल यह भी है कि क्या छह वर्षों के बाद फिर से बीजेपी पुराने सहयोगी अकाली दल के साथ हाथ मिलाएगी? राज्य में बीजेपी ने टीएमसी सरकार को तुष्टिकरण की राजनीति, महिला सुरक्षा, बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर घेरा था। टीएमसी की पिछले 15 वर्षों से राज्य में सरकार थी और उससे लोगों की नाराजगी का फायदा भी बीजेपी को मिला। इधर, पंजाब में पार्टी ने कानून-व्यवस्था को लेकर भगवंत मान सरकार की घेराबंदी शुरु कर दी है। उस पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं। पंजाब सरकार के एक मंत्री पर भी शिकंजा कसा है। नशा आज भी राज्य में बड़ी समस्या है, जो आगामी चुनाव में बड़ा मुददा बनेगा। पंजाब की तरह ही यहां भी बीजेपी स्थानीय मुद्दों पर काफी जोर दे रही है। उसका आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने पिछले चुनाव में महिलाओं को लेकर जो वादे किए थे, वो पूरे नहीं किए। फिर कृषि कानूनों के कारण पंजाब के ग्रामीण इलाकों में बीजेपी विरोध बढ़ा था। पंजाब से बीजेपी में आए छह राज्यसभा सांसदों के जरिए वह आप के संगठनात्मक ढांचे को तोड़ने में कामयाब हो सकती है। पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार रहे राघव चड्ढा, संदीप पाठक दलबदल के बाद रोज आप पर हमले कर रहे हैं। बीजेपी को लगता है कि इनकी मदद से राज्य में वह जनाधार बढ़ाने में कामयाब होगी। देखना यह भी होगा कि आप के बाकी नेता चुनाव की घोषणा होने तक एकजुट रहते हैं या नहीं? जहां कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में अकाली दल से अलग होने के बाद, 2024 लोकसभा चुनाव में दोनों के साथ आने की बात चली थी, पर ऐसा हुआ नहीं। एक बार फिर से इसकी कोशिश होती दिख रही है। हालांकि दोनों दलों के नेता यही कह रहे हैं कि वे पंजाब की सभी सीटों के लिए अलग-अलग तैयारी कर रहे हैं। आशीष/ईएमएस 13 मई 2026